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धार भोजशाला केस: सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की दलील- ‘800 साल पुरानी मस्जिद में नमाज रुकवाई गई’, CJI ने संयम बरतने की दी सलाह

धार भोजशाला विवाद को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें मुस्लिम पक्ष ने दावा किया कि लगभग 800 वर्षों से मस्जिद में नमाज अदा की जा रही थी, लेकिन हाई कोर्ट के आदेश के बाद धार्मिक गतिविधियां पूरी तरह रोक दी गईं। इस दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि अदालत में कही गई बातों का बाहर गलत अर्थ निकाला जा सकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले की जल्द सुनवाई की जाएगी।

मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील हुजैफा अहमदी ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश से पहले जो व्यवस्था लागू थी, उसे बदल दिया गया और मुस्लिम समुदाय को धार्मिक गतिविधियों से पूरी तरह बाहर कर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।

वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सुनवाई के दौरान कहा, “आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा कर देगी।” उन्होंने दलील दी कि यदि ऐतिहासिक दावों के आधार पर पुराने धार्मिक स्थलों की स्थिति बदली जाने लगे तो कई अन्य स्मारकों पर भी इसी तरह के दावे किए जा सकते हैं। सिंघवी ने कहा कि धार भोजशाला में लंबे समय तक नमाज के साथ बसंत पंचमी और मंगलवार को पूजा भी होती रही, जो सांप्रदायिक सौहार्द का उदाहरण था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अंतिम फैसला आने तक पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग की।

मुस्लिम पक्ष की वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने भी कहा कि वर्ष 1995 में दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी थी, जिसके तहत दोनों समुदाय सौहार्दपूर्ण ढंग से अपनी-अपनी धार्मिक गतिविधियां करते थे। उनके अनुसार, 800 साल पुरानी मस्जिद में नमाज रोकना एक बेहद कठोर कदम है।

वहीं, केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि हाई कोर्ट के आदेश को लागू हुए करीब दो महीने हो चुके हैं। इस दौरान प्रशासन ने आवश्यक कदम उठाए हैं और फिलहाल वहां शांति एवं कानून-व्यवस्था बनी हुई है। मुस्लिम पक्ष ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि आवश्यकता पड़ने पर पुरानी व्यवस्था बहाल की जा सकती है। इसके समर्थन में उन्होंने 1935 और 1951 के कुछ पुराने प्रशासनिक आदेशों का भी हवाला दिया।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सभी पक्षों को सार्वजनिक बयानबाजी में सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अदालत की कार्यवाही को लेकर ऐसा कोई संदेश नहीं जाना चाहिए जिससे समाज में भ्रम या तनाव की स्थिति पैदा हो। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले की जल्द सुनवाई करने का प्रयास करेगा।

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