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गोरखपुर विश्वविद्यालय में हंगामे के बाद दरोगा का छात्रों पर चिल्लाने वाला वीडियो वायरल, पुलिस ने बताया पूरा घटनाक्रम

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्र नेताओं और असिस्टेंट प्रॉक्टर के बीच हुए विवाद के बाद पुलिस के हस्तक्षेप का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में विश्वविद्यालय पुलिस चौकी प्रभारी अविरल मिश्रा छात्रों पर नाराजगी जताते और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। वीडियो में वह छात्रों से आंदोलन के तरीके पर सवाल करते हुए कहते सुनाई दे रहे हैं कि यह शांतिपूर्ण धरना नहीं है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया जाएगा।

वायरल वीडियो पर पुलिस ने रखा अपना पक्ष

वीडियो सामने आने के बाद गोरखपुर पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखा। पुलिस के मुताबिक, 8 सितंबर 2026 को गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में धरने पर बैठे निष्कासित छात्रों से प्रॉक्टर और अन्य अधिकारियों की बातचीत चल रही थी। पुलिस का कहना है कि बातचीत के दौरान कुछ छात्र उग्र हो गए और प्रॉक्टर के साथ अभद्रता करते हुए धक्का-मुक्की तथा मारपीट का प्रयास करने लगे। मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप कर प्रॉक्टर को सुरक्षित वहां से बाहर निकाला और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस के अनुसार, मामले में जांच की जा रही है और आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।

बातचीत के दौरान बिगड़ा माहौल

मामला मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे का बताया जा रहा है। असिस्टेंट प्रॉक्टर वेद प्रकाश राय प्रशासनिक भवन के नीचे पहुंचे थे, जहां छात्र नेता सतीश प्रजापति और उज्जवल सिंह भूख हड़ताल पर बैठे थे। दोनों पक्षों के बीच छात्रों की मांगों को लेकर बातचीत शुरू हुई। छात्र नेताओं ने अपनी मांगें प्रशासन के सामने रखीं, लेकिन बातचीत के दौरान सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद बहस बढ़ गई और वहां धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।

मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, इस दौरान कुछ छात्र नेता नीचे गिर गए। स्थिति बिगड़ती देख विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे। छात्रों के बीच घिरे असिस्टेंट प्रॉक्टर को गार्ड वहां से निकालकर प्रशासनिक भवन स्थित उनके कार्यालय तक ले गए। घटना के बाद छात्र नेता दोबारा अनशन पर बैठ गए। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

25 अगस्त से चल रहा है छात्रों का आंदोलन

छात्र नेताओं का आंदोलन 25 अगस्त से प्रशासनिक भवन के सामने चल रहा है। शुरुआत में छात्र धरने पर बैठे थे, लेकिन मांगों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए 5 सितंबर से आंदोलन को भूख हड़ताल में बदल दिया गया। छात्र नेता सतीश प्रजापति पिछले चार दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को उनकी मांगों पर जल्द ठोस फैसला लेना चाहिए। छात्र नेताओं ने नए कुलपति से समस्याओं के समाधान की उम्मीद भी जताई है।

निष्कासित छात्रों की बहाली प्रमुख मांग

आंदोलन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगों में विश्वविद्यालय से निष्कासित छात्रों की बहाली शामिल है। छात्र नेताओं का आरोप है कि छात्र समस्याओं को उठाने और अपनी बात रखने वाले छात्रों के खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई की गई। वे निष्कासन वापस लेने और संबंधित छात्रों को दोबारा पढ़ाई का मौका देने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग भी उठाई गई है। छात्र नेताओं का कहना है कि लंबे समय से चुनाव नहीं हुए हैं, जबकि छात्रों से छात्रसंघ शुल्क लिया जा रहा है।

हॉस्टल और पीएम-उषा योजना के काम पर भी सवाल

छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय के छात्रावासों में मेस और अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण भोजन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। वहीं, पीएम-उषा योजना के तहत विश्वविद्यालय में कराए जा रहे कार्यों को लेकर भी छात्रों ने पारदर्शिता की मांग की है। उनका सवाल है कि योजना के तहत विभिन्न कार्यों का आवंटन किस आधार पर किया जा रहा है। छात्रों ने पूरी प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने की मांग की है।

परीक्षा एजेंसी और डिग्री के नाम पर वसूली की जांच की मांग

छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय में काम कर रही परीक्षा एजेंसी की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। इसके अलावा डिग्री और अंकपत्र जारी करने के नाम पर छात्रों से कथित तौर पर पैसे लिए जाने के आरोपों की जांच की मांग की गई है। छात्र नेताओं का कहना है कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल, वायरल वीडियो और विश्वविद्यालय परिसर में हुए विवाद को लेकर पुलिस की जांच जारी है। पुलिस ने अपने बयान में घटनाक्रम के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की बात कही है, जबकि छात्र नेता अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं।

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