PM मोदी का 13वां स्वतंत्रता दिवस भाषण: बड़े सपनों से विकसित भारत तक, ‘सप्तधारा’ पर जोर

नई दिल्ली: 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 13वीं बार लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। अपने भाषण की शुरुआत उन्होंने वंदे मातरम् और तिरंगे के उल्लेख से की। पीएम मोदी ने कहा कि आज हर दिल में वंदे मातरम् की गूंज है, हर घर में तिरंगा है और हर भारतीय के मन में तिरंगा बस गया है। उन्होंने कहा कि देश नए संकल्प, ऊर्जा और उत्साह के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी समेत सभी स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का अवसर भी है।
‘अब छोटे सपनों से काम नहीं चलेगा’
प्रधानमंत्री के संबोधन का प्रमुख संदेश बड़े सपने देखने और बड़े लक्ष्य तय करने का रहा। उन्होंने कहा कि भारत अब छोटे सपनों से संतुष्ट नहीं हो सकता। बड़े सपने सोच का दायरा बढ़ाते हैं, संभावनाओं का क्षितिज विस्तृत करते हैं और विकास की रफ्तार तेज करते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने 2047 तक, यानी आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक, विकसित भारत बनने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक प्रयास, परिश्रम और भागीदारी से ही यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
12 वर्षों की उपलब्धियों का किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि एक समय भारत को ‘फ्रैजाइल फाइव’ जैसी अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, लेकिन आज देश दुनिया की प्रमुख और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने दावा किया कि इन वर्षों में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। इसके अलावा रक्षा उत्पादन में करीब चार गुना, खादी और ग्रामोद्योग में पांच गुना, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में सात गुना, रेलवे कोच निर्माण में 21 गुना और मोबाइल फोन उत्पादन में 33 गुना वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री ने इंटरनेट उपयोगकर्ताओं और डिजिटल लेनदेन में हुई तेज वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा क्षमता में भी कई गुना बढ़ोतरी हुई है और पाइप्ड गैस कनेक्शन का दायरा देश के अधिक शहरों और घरों तक पहुंचा है।
आत्मनिर्भर भारत पर जोर
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आत्मनिर्भर भारत को प्रमुख प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि भारत को दूसरे देशों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी क्षमताओं को मजबूत करना होगा। इसके लिए ‘मेक इन इंडिया’, स्वदेशी और ‘लोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देने की जरूरत है। सेमीकंडक्टर सेक्टर का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि देश में सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं और आने वाले वर्षों में इनकी संख्या और बढ़ाने की योजना है।ऊर्जा सुरक्षा के लिए परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी पीएम मोदी ने जोर दिया। उन्होंने नए परमाणु रिएक्टर स्थापित करने और देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को बड़े स्तर पर बढ़ाने का लक्ष्य सामने रखा। प्रधानमंत्री ने हाइड्रोजन ट्रेन जैसी नई तकनीकों का भी जिक्र किया।
‘सप्तधारा’ से विकास को नई गति देने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने भारत के विकास के लिए ‘सप्तधारा’ यानी सात प्रमुख शक्तियों का आह्वान किया। इनमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि एवं खाद्य उत्पादन, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, गति शक्ति, डिफेंस प्रोडक्शन, ग्रीन एवं ब्लू इकॉनमी और भारत की सॉफ्ट पावर शामिल हैं।उन्होंने कहा कि अगले पांच से सात वर्षों में वह हासिल करने का लक्ष्य है, जो पिछले पांच से सात दशकों में नहीं हो सका। मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक सप्लाई चेन का अहम केंद्र बनाने के साथ लागत, गुणवत्ता और उत्पादन के स्तर पर वैश्विक मानकों तक पहुंचने पर जोर दिया गया।पीएम मोदी ने मुक्त व्यापार समझौतों का जिक्र करते हुए कहा कि वैश्विक बाजारों तक बढ़ती पहुंच का फायदा छोटे उद्योगों, किसानों और मछुआरों को मिलना चाहिए।
युवा शक्ति बनेगी विकसित भारत की ताकत
प्रधानमंत्री ने युवाओं को विकसित भारत के निर्माण का सबसे बड़ा इंजन बताया। उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति को नई तकनीक और उभरते क्षेत्रों से जोड़ना जरूरी है।इसी दिशा में उन्होंने अगले एक साल में एक करोड़ युवाओं को AI स्किल्स की ट्रेनिंग देने का संकल्प व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय युवा AI के क्षेत्र में केवल तकनीक के उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनने की क्षमता रखते हैं। अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने बड़े लक्ष्य, आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता और युवा शक्ति के बल पर 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प दोहराया।







