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मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी का दावा- वक्फ बोर्ड की जांच हुई तो सामने आ सकता है बड़ा घोटाला

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी बरेलवी ने वक्फ संपत्तियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि यदि वक्फ बोर्ड की निष्पक्ष जांच कराई गई तो देश के सामने बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने कहा कि केवल बरेली में ही वक्फ की जमीनों से जुड़े करोड़ों और अरबों रुपये के घोटाले हुए हैं। उनका आरोप है कि वक्फ की संपत्तियों का इस्तेमाल समाज और जरूरतमंदों के हित में होने के बजाय निजी लाभ के लिए किया गया।

मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जांच की मांग

मौलाना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वक्फ शरीयत और धार्मिक व्यवस्था से जुड़ा विषय है और इसकी संपत्तियां गरीबों, यतीमों, विधवाओं तथा जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए समर्पित की गई थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ संपत्तियों को कथित तौर पर भू-माफियाओं के हवाले कर दिया गया, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को मिलने वाला लाभ प्रभावित हुआ।

सपा शासनकाल में अनियमितताओं का आरोप

मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने आरोप लगाया कि वक्फ संपत्तियों को सबसे अधिक नुकसान समाजवादी पार्टी के शासनकाल के दौरान हुआ। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव सरकार के दौरान वक्फ और अल्पसंख्यक मामलों से जुड़े विभागों में लिए गए कुछ फैसलों की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कुछ पूर्व पदाधिकारियों और अधिकारियों का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हुईं और कई संपत्तियां कथित तौर पर गलत तरीके से हस्तांतरित कर दी गईं।

दोषियों पर कार्रवाई की मांग

मौलाना ने मांग की कि वक्फ बोर्ड द्वारा बेची गई या हस्तांतरित की गई सभी संपत्तियों की जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यदि वक्फ की आय का उपयोग पारदर्शिता के साथ गरीब और जरूरतमंद मुसलमानों की शिक्षा, इलाज और सामाजिक उत्थान पर किया जाए, तो समुदाय के आर्थिक सशक्तिकरण में बड़ी भूमिका निभाई जा सकती है।

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