Main Slideराष्ट्रीय

महिला आरक्षण से जुड़े बिल पर सियासत तेज, प्रियंका गांधी बोलीं- कल जो भी हुआ वो लोकतंत्र की बहुत बड़ी जीत है

नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण और सीटों के परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन बिल के पास न हो पाने के बाद सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने शनिवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया। प्रियंका गांधी ने कहा कि “कल जो भी हुआ, वह लोकतंत्र की बहुत बड़ी जीत है। लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश को रोक दिया गया। यह संविधान, देश और विपक्ष की एकता की जीत है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में विपक्ष पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही थी। “हमें कहा जा रहा था कि अगर आप इस बिल से सहमत नहीं हैं, तो यहां से जा सकते हैं। हम हैरान थे कि आखिर इनकी मंशा क्या है। किसी को एक दिन पहले तक नहीं पता था कि क्या होने वाला है,” उन्होंने कहा। प्रियंका गांधी ने दावा किया कि विपक्ष ने मिलकर परिसीमन की साजिश को नाकाम कर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन जिस तरीके से यह बिल लाया गया, उसका समर्थन नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा, “सरकार को पुराने महिला आरक्षण विधेयक को ही वापस लाना चाहिए। यह साफ है कि यह बिल महिलाओं के लिए नहीं, बल्कि परिसीमन के लिए लाया गया था।”  कांग्रेस सांसद ने केंद्र सरकार पर सत्ता में बने रहने के लिए साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 2029 तक परिसीमन संभव नहीं है, लेकिन सरकार इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना चाहती थी।

प्रियंका ने कहा, “उन्हें लगा होगा कि अगर बिल पास नहीं होगा, तो विपक्ष को महिला विरोधी बताया जाएगा और खुद महिलाओं के मसीहा बन जाएंगे। लेकिन महिलाएं सब देख रही हैं—उन्नाव, हाथरस और मणिपुर की घटनाएं उनके सामने हैं।” प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक हल्का पल भी देखने को मिला। जब एक पत्रकार ने समय को लेकर सवाल किया, तो प्रियंका गांधी ने मुस्कुराते हुए कहा, “सवाल छोटा रखिए, आज मेरे पति (रॉबर्ट वाड्रा) का जन्मदिन है।”

एक दिन पहले लोकसभा में संविधान का 131वां संशोधन बिल पेश किया गया था, जिसका मकसद सीटों की संख्या बढ़ाना था। करीब 21 घंटे की लंबी बहस के बाद वोटिंग हुई, जिसमें 528 सांसदों ने हिस्सा लिया। वोटिंग में बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण बिल पास नहीं हो सका।

गौरतलब है कि मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में यह पहला मौका है जब कोई अहम बिल लोकसभा में पास नहीं हो पाया। इसके चलते अब नई जनगणना के नतीजों से पहले महिला आरक्षण लागू नहीं हो सकेगा। यानी साफ है कि 2029 के लोकसभा चुनावों में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित नहीं होंगी। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक घमासान और तेज होने के आसार हैं।

Show More

Related Articles

Back to top button
Close
Close