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सेमग्रस्त 201 गांवों को राहत: पंजाब सरकार ने अग्रिम धान बुवाई की दी छूट

पंजाब सरकार ने सेम (जलभराव) से प्रभावित राज्य के 201 गांवों को बड़ी राहत देते हुए अग्रिम धान बुवाई की अनुमति दे दी है। इस फैसले के तहत किसान अब तय समय से पहले धान की खेती कर सकेंगे। यह छूट अगले दो वर्षों के लिए लागू रहेगी। आमतौर पर राज्य में भू-जल स्तर को बचाने के लिए 10 मई से पहले धान की नर्सरी लगाने पर रोक होती है। गुरदासपुर जिले के तीन गांव—भुल्लर, अठवाल और कोटली सूरत मल्ली—भी इस सूची में शामिल हैं, जहां करीब 200 एकड़ जमीन सेमग्रस्त बताई गई है। डेरा बाबा नानक ब्लॉक के सरपंचों की मांग पर यह फैसला लिया गया।

निज्जरपुर गांव के सरपंच रणदीप सिंह ने बताया कि पिछले साल अगस्त में सक्की किरण नाले और रावी नदी में आई बाढ़ से धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी। इसके बाद किसानों ने गेहूं की बुवाई की, लेकिन खेतों में सेम आ जाने के कारण गेहूं की फसल भी खराब हो गई। कई किसानों को प्रति एकड़ सिर्फ डेढ़ से तीन क्विंटल तक ही उत्पादन मिला, जो सामान्य से काफी कम है।

किसानों और पंचायत प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की थी कि सेम प्रभावित खेतों में अग्रिम धान बुवाई की अनुमति दी जाए। इसके बाद सरकार ने कृषि विभाग की टीमों से जांच करवाई, जिसमें पाया गया कि जमीन में डेढ़ से दो फुट खुदाई करने पर ही पानी भर जाता है।

जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने 201 गांवों को सेमग्रस्त घोषित किया है। इनमें श्री मुक्तसर साहिब के 95, फाजिल्का के 81, फरीदकोट के 19, बठिंडा के 2 और मानसा का 1 गांव शामिल है। सरकार ने इन क्षेत्रों को ‘पंजाब प्रिजर्वेशन ऑफ सब-सायल वाटर एक्ट, 2009’ की धारा 3(3)(सी) के तहत दो साल के लिए छूट दी है। इससे किसान अब अपनी सुविधा अनुसार धान की बुवाई कर सकेंगे।

किसानों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे उनकी आर्थिक स्थिति को राहत मिलेगी। साथ ही उन्होंने सरकार से मांग की है कि सेम के कारण खराब हुई गेहूं की फसल का भी जल्द मुआवजा दिया जाए। जिला गुरदासपुर के कृषि अधिकारी डॉ. ठाकुर रणधीर सिंह ने बताया कि यह छूट केवल सेमग्रस्त घोषित गांवों के लिए है, जबकि अन्य क्षेत्रों में धान की बुवाई और रोपाई तय सरकारी नियमों के अनुसार ही होगी।

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