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टीएमसी संकट पर ओवैसी का हमला, बोले- हमें बीजेपी की ‘बी टीम’ कहने वाले अब चुप क्यों हैं?

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर उभरे राजनीतिक संकट को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जो लोग लंबे समय से एआईएमआईएम को भाजपा की ‘बी टीम’ बताते रहे हैं, वे टीएमसी में हुई बड़ी राजनीतिक टूट पर चुप्पी साधे हुए हैं। बहराइच में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने बिना किसी का नाम लिए टीएमसी के कुछ नेताओं पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले धार्मिक पहचान की राजनीति करते थे, वही आज भाजपा नेताओं के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी में हुई टूट ने उन दावों की पोल खोल दी है, जिनके आधार पर एआईएमआईएम पर लगातार आरोप लगाए जाते रहे हैं।

‘हम पर आरोप लगाने वाले जवाब दें’

ओवैसी ने कहा कि जब भी किसी क्षेत्र में एआईएमआईएम राजनीतिक रूप से मजबूत होती है, तब उसे भाजपा की सहयोगी पार्टी बताकर निशाना बनाया जाता है। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी के कई सांसदों के पार्टी छोड़ने के बावजूद इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की ओर से कोई गंभीर प्रतिक्रिया नहीं आई है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद जनता का विश्वास हासिल किया है और बिहार में दोबारा चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मतदाताओं, खासकर बहराइच और मटेरा क्षेत्र की जनता से एआईएमआईएम का समर्थन करने की अपील की।

2027 के चुनाव पर भी दिया बयान

ओवैसी ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं के बीच राजनीतिक जागरूकता बढ़ रही है और वे अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में स्थानीय स्तर से नई नेतृत्व क्षमता उभरकर सामने आएगी। साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जिन नेताओं और परिवारों को वर्षों तक जनता ने समर्थन दिया, वे क्षेत्र के विकास की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। उन्होंने स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के मुद्दों को उठाते हुए विपक्षी दलों की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए।

गठबंधन के लिए रखी सम्मान की शर्त

समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में ओवैसी ने 2027 के चुनावों में संभावित गठबंधन को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यदि कोई दल भाजपा को चुनौती देने के लिए गंभीर प्रयास करता है तो एआईएमआईएम उसके साथ आने पर विचार कर सकती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी गठबंधन में उनकी पार्टी को सम्मानजनक और बराबरी का दर्जा मिलना चाहिए।

टीएमसी में बगावत से बढ़ी सियासी हलचल

गौरतलब है कि 14 जून को टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने क्षेत्रीय राजनीतिक दल नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय का ऐलान कर दिया। बागी सांसदों के समूह का नेतृत्व कर रहीं काकोली घोष ने कहा कि सभी सांसदों ने सामूहिक रूप से नई राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया है। टीएमसी में इस बड़े घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है, जिस पर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं।

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