पायलटों की कमी दूर करने की तैयारी, देश में खुलेंगे 11 नए फ्लाइंग स्कूल; अगले 10 साल में 31 हजार पायलटों की होगी जरूरत

देश में तेजी से बढ़ रहे एविएशन सेक्टर की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार ने पायलट प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने सात एयरपोर्ट पर 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) स्थापित करने की टेंडर प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इन संस्थानों के शुरू होने से देश में पायलटों की कमी दूर करने के साथ-साथ छात्रों को घरेलू स्तर पर बेहतर प्रशिक्षण की सुविधा मिलेगी।
अगले 10 साल में 31 हजार अतिरिक्त पायलटों की जरूरत
नागर विमानन मंत्रालय के अनुसार, भारत में अगले एक दशक में लगभग 30 से 31 हजार अतिरिक्त पायलटों की आवश्यकता होगी। वहीं, अगले पांच वर्षों में भारतीय एयरलाइंस अपने बेड़े में करीब 500 नए विमान शामिल कर सकती हैं। इसके अलावा, देशभर में लगभग 50 नए एयरपोर्ट विकसित होने की संभावना है, जिससे प्रशिक्षित पायलटों की मांग और बढ़ेगी।
घरेलू प्रशिक्षण क्षमता को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
अप्रैल 2026 तक भारत में DGCA से मान्यता प्राप्त 41 फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) 63 फ्लाइंग बेस से संचालित हो रहे हैं। 11 नए FTO शुरू होने के बाद भारतीय छात्रों को पायलट प्रशिक्षण के लिए विदेश जाने की आवश्यकता कम होगी और देश की प्रशिक्षण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। शुरुआती चरण में इन नए संस्थानों में 60 से 70 प्रशिक्षण विमान शामिल किए जाएंगे। पूर्ण क्षमता पर इनका बेड़ा बढ़कर 110 से 120 विमानों तक पहुंच सकता है। शुरुआत में इन संस्थानों से हर वर्ष 400 से 500 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि पूरी क्षमता विकसित होने पर यह संख्या करीब 1,500 तक पहुंच सकती है।
पायलट लाइसेंस जारी होने की संख्या में बढ़ोतरी
भारत में कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) जारी होने की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2018 में जहां 640 CPL जारी किए गए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 1,628 हो गई। हाल के वर्ष में DGCA ने विदेशी प्रशिक्षण संस्थानों से पढ़ाई करने वाले कैडेट्स को 615 CPL जारी किए, जबकि 2,309 स्टूडेंट पायलट लाइसेंस (SPL) भी जारी किए गए। यह विमानन क्षेत्र में बढ़ती रुचि और प्रशिक्षण की मांग को दर्शाता है।
रीजनल एयरपोर्ट पर प्रशिक्षण से छात्रों को होगा लाभ
सरकार की योजना के तहत रीजनल एयरपोर्ट पर नए फ्लाइंग ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इससे पायलट बनने की तैयारी कर रहे छात्रों को अधिक सुलभ और अपेक्षाकृत किफायती प्रशिक्षण मिलेगा। साथ ही, क्षेत्रीय एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग होगा और देश के तेजी से विस्तार कर रहे एविएशन सेक्टर को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।







