पेपर लीक पर सख्त कानून की तैयारी: लोकसभा में संशोधन विधेयक पेश, दोषियों को 10 साल तक की जेल का प्रावधान

सरकार ने सोमवार को लोकसभा में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों पर सख्ती के लिए लोक परीक्षा (संशोधन) विधेयक पेश किया। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के हंगामे के बीच सदन में यह बिल प्रस्तुत किया। हालांकि, विधेयक पर चर्चा और मतदान अभी होना बाकी है। बिल पेश किए जाने के दौरान विपक्षी सांसदों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष की ओर से “मोदी-शाह छात्रों से माफी मांगें” के नारे लगाए गए। लगातार हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक और बाद में दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई।
विपक्ष ने उठाई थी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
इससे पहले विपक्ष ने मांग की थी कि जब तक तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक वह सदन में किसी अन्य मुद्दे पर चर्चा नहीं करेगा। हाल ही में सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक की घटनाओं की रोकथाम के लिए एक टास्क फोर्स भी गठित की है।
10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान
लोकसभा सदस्यों को वितरित विधेयक की प्रति के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति प्रश्नपत्र लीक करने, परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने या ऐसी गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसे कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा हो सकती है। इसके साथ ही 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है। विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि ऐसे मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी की जाए। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने का प्रावधान किया गया है, ताकि आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा किया जा सके।
सरकार ने विपक्ष से सहयोग की अपील की
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही बाधित न करने की अपील करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए इस महत्वपूर्ण विधेयक पर सार्थक चर्चा और शीघ्र पारित होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह कानून परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।







