MP के बाद अब यूपी में भी बदलेगा वक्फ बोर्ड का स्वरूप, दो गैर-मुस्लिम सदस्य और दो मुस्लिम महिलाओं को मिलेगी जगह

मध्य प्रदेश के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी वक्फ बोर्ड के गठन में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। राज्य सरकार जल्द ही नए सुन्नी वक्फ बोर्ड का गठन करने जा रही है, जिसमें पहली बार दो गैर-मुस्लिम सदस्यों और दो मुस्लिम महिलाओं को शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही पसमांदा मुस्लिम समुदाय को भी बोर्ड में प्रतिनिधित्व देने की तैयारी है। सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से वक्फ बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
11 सदस्यीय होगा नया सुन्नी वक्फ बोर्ड
प्रस्तावित सुन्नी वक्फ बोर्ड में कुल 11 सदस्य होंगे, जिनमें एक चेयरमैन और 10 सदस्य शामिल रहेंगे। इन सदस्यों में दो गैर-मुस्लिम, दो मुस्लिम महिलाएं और पसमांदा समुदाय के प्रतिनिधि को भी स्थान दिया जाएगा।
कार्यकाल समाप्त होने के बाद नए बोर्ड की तैयारी
उत्तर प्रदेश के सुन्नी वक्फ बोर्ड का कार्यकाल मार्च 2026 में समाप्त हो चुका है, जबकि शिया वक्फ बोर्ड का कार्यकाल अक्टूबर 2026 में पूरा होगा। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने नए बोर्ड के गठन की प्रक्रिया तेज कर दी है।
यूपी में दो लाख से अधिक वक्फ संपत्तियां
प्रदेश में कुल 2,32,547 वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें 2,17,161 संपत्तियां सुन्नी वक्फ बोर्ड और 15,386 संपत्तियां शिया वक्फ बोर्ड के अधीन हैं। वहीं, ‘उम्मीद’ पोर्टल पर अब तक 92 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण किया जा चुका है।
सपा ने सरकार पर साधा निशाना
नए वक्फ बोर्ड के प्रस्तावित स्वरूप को लेकर समाजवादी पार्टी ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने आरोप लगाया कि सरकार का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण स्थापित करना है। उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन लोगों पर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, वे वक्फ बोर्ड में निष्पक्ष काम कैसे कर सकते हैं। (यह सपा विधायक का राजनीतिक बयान है।)
मध्य प्रदेश में कांग्रेस करेगी कानूनी चुनौती
वहीं, मध्य प्रदेश में वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने के फैसले का कांग्रेस ने विरोध किया है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि वक्फ अधिनियम से जुड़ा मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। ऐसे में अंतिम फैसला आने से पहले बोर्ड का पुनर्गठन और नई नियुक्तियां उचित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी और बोर्ड के पुनर्गठन की वैधानिकता पर सवाल उठाएगी।







