NCERT की नई किताब में बड़ा बदलाव: अब आर्थिक स्थिति भी मानी जाएगी भेदभाव का आधार

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जारी NCERT की कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान (भाग-2) की पुस्तक में भेदभाव (Discrimination) की परिभाषा में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। नई किताब ‘Exploring Society: India and Beyond’ के ‘नागरिकता: अधिकार और कर्तव्य’ अध्याय में अब आर्थिक स्थिति (Economic Background) को भी भेदभाव का एक आधार माना गया है।
क्या कहती है नई NCERT किताब?
पुस्तक के अनुसार, किसी व्यक्ति या समूह के साथ उसकी जाति, धर्म, नस्ल, जातीय पहचान, दिव्यांगता, शारीरिक बनावट, लिंग, यौन पहचान या आर्थिक स्थिति के आधार पर अनुचित व्यवहार करना भेदभाव की श्रेणी में आता है। किताब में स्पष्ट किया गया है कि इस तरह का व्यवहार न केवल सामाजिक और नैतिक रूप से गलत है, बल्कि कानून के भी विरुद्ध है।
आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों का भी जिक्र
नई पुस्तक में बताया गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी कई बार शिक्षा और सामाजिक जीवन में भेदभाव का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से आर्थिक स्थिति को भी भेदभाव के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है।
क्यों चर्चा में है यह बदलाव?
यह संशोधन ऐसे समय में सामने आया है, जब UGC के ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026’ में भेदभाव की परिभाषा में धर्म, जाति, नस्ल, लिंग, जन्मस्थान और दिव्यांगता जैसे आधार तो शामिल किए गए हैं, लेकिन आर्थिक स्थिति का अलग से उल्लेख नहीं किया गया। इसे लेकर कई विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए थे और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के साथ होने वाले भेदभाव को भी स्पष्ट रूप से मान्यता देने की मांग की थी।
कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में भी हुए हैं बदलाव
इससे पहले NCERT ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में भी नया अध्याय जोड़ा था, जिसमें मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका को शामिल किया गया है। पुस्तक में भारत की चुनावी व्यवस्था को दुनिया की सबसे व्यापक लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में से एक बताते हुए चुनाव आयोग की स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने, मतदाता सूची तैयार करने तथा लोकतंत्र को मजबूत बनाने में भूमिका का विस्तार से उल्लेख किया गया है।







