मध्यस्थ बनने निकला पाकिस्तान, खुद फंसा संकट में! संयुक्त अरब अमीरात भी हुआ नाराज़

पाकिस्तान इस वक्त गंभीर आर्थिक दबाव से गुजर रहा है और इसकी बड़ी वजह बन रहा है अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद कैबिनेट बैठक में स्वीकार किया है कि महंगे होते कच्चे तेल और क्षेत्रीय अस्थिरता ने देश की कमर तोड़ दी है। इस्लामाबाद में हुई बैठक के दौरान शहबाज शरीफ ने बताया कि संघर्ष से पहले जहां पाकिस्तान का तेल आयात करीब 300 मिलियन डॉलर था, वहीं अब यह बढ़कर 800 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। यानी सीधे तौर पर 500 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त बोझ देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। हालात इतने खराब हैं कि पिछले हफ्ते के मुकाबले इस हफ्ते पेट्रोलियम की खपत में भी गिरावट दर्ज की गई है।
मध्यस्थता की कोशिश नाकाम, बढ़ी मुश्किलें
शहबाज शरीफ ने यह भी साफ किया कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम कराने की कोशिश की, लेकिन उसे कोई सफलता नहीं मिली। दोनों देशों के बीच बातचीत का अगला दौर भी तय नहीं हो पाया है। ऐसे में पाकिस्तान की चिंता और बढ़ गई है।
तेल संकट गहराया, सिर्फ 5-7 दिन का स्टॉक
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के पास कच्चे तेल का भंडार अब सिर्फ 5 से 7 दिनों के लिए ही बचा है। ऊर्जा और वित्त मंत्रालय ने भी इस बात को स्वीकार किया है। हालात संभालने के लिए सरकार ने कई सख्त कदम उठाए हैं—वर्क फ्रॉम होम की सलाह, सरकारी खर्च में कटौती और मंत्रियों-अधिकारियों के वेतन में कटौती तक शामिल है।
खाड़ी देशों से रिश्तों में दरार
इस संकट के बीच संयुक्त अरब अमीरात भी पाकिस्तान से नाराज बताया जा रहा है। ईरान के खिलाफ स्पष्ट रुख न अपनाने पर UAE ने अपनी आर्थिक मदद वापस मांग ली है। अब पाकिस्तान को मजबूरी में सऊदी अरब जैसे देशों से कर्ज लेकर पुराने कर्ज चुकाने पड़ रहे हैं।
सरकार का दावा – स्थिति नियंत्रण में
हालांकि, शहबाज शरीफ ने पेट्रोलियम मंत्री की तारीफ करते हुए कहा कि अन्य देशों के मुकाबले पाकिस्तान में स्थिति अभी नियंत्रण में है और कहीं भी लंबी कतारें नहीं लगी हैं। लेकिन सच्चाई यही है कि बढ़ती कीमतें और घटता भंडार आने वाले दिनों में पाकिस्तान के लिए बड़ा संकट खड़ा कर सकता है। अमेरिका-ईरान तनाव का सीधा असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है। तेल संकट, कर्ज का दबाव और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में खटास—ये तीनों मिलकर पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं।







