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भारतीय हॉकी टीम की नई केसरिया जर्सी पर सियासी घमासान, विपक्ष ने उठाए सवाल, हॉकी इंडिया ने बताई तकनीकी वजह

भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी का रंग बदलने के फैसले को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। हॉकी इंडिया ने टीम की पारंपरिक नीली जर्सी की जगह केसरिया रंग की नई प्लेइंग किट जारी की है। इसके बाद विपक्षी दलों के कई नेताओं ने इस फैसले पर सवाल उठाए, जबकि हॉकी इंडिया ने इसे पूरी तरह तकनीकी आवश्यकता पर आधारित निर्णय बताया है।

प्रियंका गांधी ने बताया ‘इतिहास बदलने की कोशिश’

संसद परिसर के बाहर प्रियंका गांधी ने जर्सी के रंग में बदलाव को इतिहास और पहचान बदलने की कोशिश करार दिया। उन्होंने कहा कि चाहे यूनिफॉर्म बदली जाए या शिक्षा नीति के जरिए इतिहास को नए सिरे से लिखने की कोशिश की जाए, देश के युवा अपनी राय स्पष्ट कर चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई अहिंसा और सत्य के सिद्धांतों पर आधारित थी और इसकी विरासत को बदला नहीं जा सकता।

पूर्व कप्तान विरेन रास्किन्हा ने जताई नाराजगी

भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान विरेन रास्किन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर नई जर्सी की आलोचना करते हुए इसे “शर्मनाक” बताया। उन्होंने लिखा कि भारतीय हॉकी टीम की पहचान हमेशा नीले रंग से रही है और वर्षों तक खिलाड़ियों ने गर्व के साथ नीली जर्सी पहनी है। उन्होंने सवाल किया कि केसरिया रंग चुनने का आधार क्या है।

विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी उठाए सवाल

उदयवीर सिंह ने कहा कि जिस जर्सी को पहनकर भारतीय टीम वर्षों तक खेलती रही, उससे खिलाड़ियों और प्रशंसकों का भावनात्मक जुड़ाव होना स्वाभाविक है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस बदलाव के पीछे की वजह हॉकी इंडिया बेहतर तरीके से स्पष्ट कर सकता है। वहीं सुधाकर सिंह ने फैसले पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार से जुड़े लोग हर चीज को भगवा रंग में रंगने की मानसिकता रखते हैं। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने नई जर्सी का समर्थन करते हुए कहा कि केसरिया रंग भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है और इस पर विवाद नहीं होना चाहिए।

हॉकी इंडिया ने दी तकनीकी सफाई

विवाद बढ़ने के बाद हॉकी इंडिया ने बयान जारी कर कहा कि जर्सी का रंग बदलने का फैसला खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और सपोर्ट स्टाफ से विस्तृत चर्चा के बाद लिया गया। संस्था के मुताबिक, नीली जर्सी अंतरराष्ट्रीय हॉकी पिचों की नीली सिंथेटिक सतह के साथ घुल-मिल जाती थी, जिससे खिलाड़ियों की दृश्यता प्रभावित होती थी।

हॉकी इंडिया ने बताया कि इसी कारण खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ ने पीले या केसरिया जैसे रंगों का सुझाव दिया। विचार-विमर्श के बाद केसरिया रंग को चुना गया, क्योंकि यह दृश्यता बेहतर बनाने के साथ-साथ भारतीय तिरंगे का भी एक प्रमुख रंग है, जो साहस, त्याग और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक माना जाता है।

संस्था ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय टीम की प्लेइंग किट का रंग समय-समय पर बदला जाता रहा है। उदाहरण के तौर पर, 2014 FIH हॉकी विश्व कप के दौरान भारतीय टीम ने पीली जर्सी पहनी थी, जबकि 2018 FIH हॉकी विश्व कप में अलग डिजाइन वाली आसमानी नीली जर्सी का इस्तेमाल किया गया था।

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