जन्माष्टमी पर CM योगी की प्रदेशवासियों से अपील, बोले- विरासत बचाने और विकसित यूपी बनाने का लें संकल्प

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। सोमवार को जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने लोगों से अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, सामाजिक समरसता और विकसित एवं गौरवशाली उत्तर प्रदेश के निर्माण का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके संदेशों से सत्य, धर्म, कर्म और लोककल्याण की प्रेरणा मिलती है।
श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में छिपा जीवन का संदेश
सीएम योगी ने अपने संदेश में कहा कि भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्यरात्रि में मथुरा के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य ऐसे समय हुआ, जब असत्य और अन्याय का अंधकार था। उनके जन्म के साथ सत्य और धर्म के प्रकाश का संदेश सामने आया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल धार्मिक कथाएं नहीं हैं, बल्कि इनमें जीवन और समाज के लिए गहरे संदेश भी निहित हैं। उन्होंने माखन चोरी को सहजता और निश्छलता, गोप-गोपियों के साथ संबंधों को प्रेम और सामाजिक समरसता तथा कालिय नाग के दमन को अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक बताया। उन्होंने प्रदेशवासियों को 4 सितंबर 2026 को मनाई जाने वाली श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं भी दीं।
सामूहिक एकजुटता से मजबूत होता है समाज
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से समाज में सामूहिक सहयोग और एकजुटता का महत्व समझा जा सकता है। गोवर्धन पर्वत धारण करने की लीला के माध्यम से उन्होंने प्रकृति, पशुधन और कृषि आधारित जीवन के संरक्षण के साथ सामूहिक शक्ति का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वृंदावन, बरसाना और नंदगांव समेत ब्रज क्षेत्र की धरती आज भी श्रीकृष्ण की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना को अपने भीतर संजोए हुए है।
श्रीकृष्ण ने दिया समानता और आत्मीयता का संदेश
सीएम योगी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण केवल किसी एक वर्ग या कुल के प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता के संदेशवाहक हैं। उन्होंने समाज के अलग-अलग वर्गों के साथ आत्मीय संबंध स्थापित किए। मुख्यमंत्री ने श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्चे रिश्ते पद, प्रतिष्ठा या आर्थिक स्थिति से नहीं, बल्कि आत्मीयता से मजबूत होते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समाज में समानता, समरसता और आपसी भाईचारे की यही भावना सबसे ज्यादा जरूरी है।
‘अन्याय का विरोध और निर्बल की रक्षा लोककल्याण का आधार’
सीएम योगी ने कहा कि योगेश्वर श्रीकृष्ण का जीवन लोककल्याणकारी शासन की भावना की भी प्रेरणा देता है। अन्याय का प्रतिकार, धर्म की रक्षा, कमजोर व्यक्ति का संरक्षण और समाज के हित में काम करना उनके जीवन-दर्शन के प्रमुख आधार रहे। उन्होंने कहा कि इसी भावना के साथ प्रदेश सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को सम्मान और सुरक्षा देने के लिए काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने गरीबी उन्मूलन, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, किसानों को सहयोग और बेटियों को बेटों के समान आगे बढ़ने का अवसर देने को सरकार के लोककल्याणकारी प्रयासों का हिस्सा बताया।
गीता का कर्म और कर्तव्य का संदेश आज भी प्रासंगिक
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता में कर्म, ज्ञान और कर्तव्य का जो मार्ग बताया, वह किसी एक काल तक सीमित नहीं है। जीवन की विभिन्न चुनौतियों में यह संदेश आज भी मार्गदर्शन देता है।उन्होंने निष्काम कर्म, सत्य के प्रति प्रतिबद्धता और लोकमंगल की भावना को जीवन में अपनाने की जरूरत बताई। सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की धरती श्रीकृष्ण की लीलाओं और उनके संदेशों से गहराई से जुड़ी हुई है। मथुरा, गोकुल, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और नंदगांव प्रदेश की सनातन सांस्कृतिक चेतना के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि जन्माष्टमी के अवसर पर वे भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने और विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प लें।







