राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: ट्रस्टी अनिल मिश्रा से SIT की पूछताछ, कई आरोपियों की संपत्तियां जांच के दायरे में

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच टीम (SIT) ने गुरुवार को अयोध्या पहुंचकर मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी अनिल मिश्रा से पूछताछ की। जांच के दूसरे चरण में करीब 10 लोगों को रडार पर रखा गया है। सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी चंपत राय से भी दोबारा पूछताछ की जा सकती है।
अनिल मिश्रा की भूमिका की जांच
जांच एजेंसियां अनिल मिश्रा की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। आरोप है कि मंदिर में कर्मचारियों की भर्ती में अनियमितताएं और रिश्वतखोरी हुई हो सकती है। SIT यह भी जांच कर रही है कि महाकुंभ के दौरान चढ़ावे की गिनती और नकदी के प्रबंधन में कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई। इस सिलसिले में मंदिर के कई सेवादारों से भी पूछताछ की गई है।
गिरफ्तार आरोपियों से मिले अहम सुराग
सूत्रों के अनुसार, मामले में गिरफ्तार कई आरोपियों ने पूछताछ के दौरान अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम लिया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या आरोपियों की नियुक्तियां सिफारिश के आधार पर हुई थीं और क्या चोरी किसी संगठित गिरोह की तरह अंजाम दी गई।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों की आय और उनकी संपत्तियों में असामान्य बढ़ोतरी का स्रोत क्या है। जांच के दायरे में उनकी चल-अचल संपत्तियां, बैंक खाते और अन्य वित्तीय लेन-देन शामिल हैं।
अविनाश शुक्ला पुलिस रिमांड पर
मामले के आरोपी अविनाश शुक्ला को अदालत ने 24 घंटे की पुलिस रिमांड पर भेजा है। वह प्रतापगढ़ जिले के नरियावां बाबूपुर गांव का रहने वाला है और वर्ष 2025 में राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती का कार्य संभाल रहा था। जांच एजेंसियां उसकी संपत्तियों और आर्थिक स्थिति में आए बदलाव की भी जांच कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह पता लगाया जा रहा है कि उसकी संपत्ति वैध आय से अर्जित की गई है या नहीं।
लवकुश मिश्रा के मकान पर कार्रवाई की तैयारी
मामले के एक अन्य आरोपी लवकुश मिश्रा की संपत्तियां भी जांच के दायरे में हैं। बताया जा रहा है कि उसने अयोध्या के शहादतगंज क्षेत्र में अपनी पत्नी के नाम पर एक प्लॉट खरीदकर तीन मंजिला मकान का निर्माण कराया था। Ayodhya Development Authority (ADA) ने निर्माण में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए उसकी पत्नी को नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण ने सात दिन के भीतर जवाब मांगा है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो नियमानुसार अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल SIT पूरे मामले में वित्तीय लेन-देन, नियुक्तियों की प्रक्रिया और चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।







