PM मोदी और जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की शिखर वार्ता, सेमीकंडक्टर, AI और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के साथ द्विपक्षीय शिखर वार्ता की। बैठक में दोनों देशों ने आर्थिक साझेदारी को नई गति देने, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत बनाने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों, रक्षा, सुरक्षा और निवेश जैसे कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की। शिखर वार्ता से पहले राष्ट्रपति भवन में जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची का औपचारिक स्वागत किया गया, जहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि यह बैठक भारत और जापान के बीच भरोसे, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित की गई। दोनों नेताओं ने सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, फार्मास्यूटिकल्स, AI, उभरती तकनीकों और लचीली सप्लाई चेन विकसित करने पर विशेष जोर दिया।
जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची 1 से 3 जुलाई तक भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरान वह 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगी। सम्मेलन में दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा करेंगे और क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती प्रदान करना है। अपने दौरे के दौरान सानाए ताकाइची भारत-जापान बिजनेस फोरम में भी शामिल होंगी। इस मंच पर दोनों देशों की सरकारों और उद्योग जगत के प्रतिनिधि निवेश, व्यापार और औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने के नए अवसरों पर चर्चा करेंगे।
भारत और जापान के संबंध पिछले एक दशक में लगातार मजबूत हुए हैं। वर्ष 2014 में दोनों देशों ने अपने रिश्तों को ‘विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी’ का दर्जा दिया था। वर्ष 2027 में भारत और जापान राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे करेंगे, जिसे दोनों देश द्विपक्षीय सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देख रहे हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2025 में टोक्यो की यात्रा के दौरान 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया था। यह वार्षिक सम्मेलन दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने का सबसे अहम द्विपक्षीय मंच माना जाता है।







