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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: RMO अर्जुन देव का गोरखपुर तबादला, 8 आरोपी 14 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में; 70-80 लोग जांच के दायरे में

अयोध्या: राम मंदिर के कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार तेज होती जा रही है। विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के बाद लंबे समय से राम मंदिर में तैनात रेडियो मेंटेनेंस ऑफिसर (RMO) अर्जुन देव का गोरखपुर तबादला कर दिया गया है। वहीं, मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को एंटी करप्शन कोर्ट ने 14 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अब बैंक कर्मचारियों, मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों और अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी गहन जांच कर रही है।

17 साल से अयोध्या में तैनात थे अर्जुन देव

अर्जुन देव वर्ष 2009 से अयोध्या में तैनात थे। इस दौरान उनका कई बार तबादला हुआ, लेकिन हर बार किसी न किसी स्तर पर रुक गया। हाल ही में उनका लखनऊ तबादला भी निरस्त हो गया था। SIT की रिपोर्ट आने के बाद अब उन्हें गोरखपुर भेज दिया गया है। राम मंदिर के काउंटिंग रूम में चढ़ावे की गिनती के दौरान लगे CCTV कैमरों के साथ-साथ पूरे मंदिर परिसर में लगे करीब 1,600 CCTV कैमरों और वायरलेस नेटवर्क की निगरानी की जिम्मेदारी अर्जुन देव के पास थी।

70 से 80 लोग जांच के घेरे में

सूत्रों के अनुसार, SIT रिपोर्ट में अर्जुन देव की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में उल्लेख है कि वह अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर VVIP दर्शन व्यवस्था और मंदिर प्रशासन से जुड़े कई कार्यों में भी सक्रिय थे। यह भी कहा जा रहा है कि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों से करीबी के चलते उनका तबादला कई बार टलता रहा। जांच अब केवल ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और गिरफ्तार आठ आरोपियों तक सीमित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में 70 से 80 लोग जांच के दायरे में हैं। सभी को नोटिस भेजे जा रहे हैं और उनसे पूछताछ की जाएगी।

SBI समेत छह बैंकों को नोटिस

जांच एजेंसियों ने उन बैंकों को भी नोटिस जारी किए हैं, जहां राम मंदिर ट्रस्ट के खाते संचालित हैं। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक सहित करीब छह बैंक शामिल हैं। एसबीआई से उन कर्मचारियों की सूची मांगी गई है, जिनकी ड्यूटी चढ़ावे की गिनती के दौरान लगाई गई थी। पुलिस को बैंक के दो कर्मचारियों रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप की भूमिका पर भी संदेह है, क्योंकि दोनों कैश काउंटिंग प्रक्रिया की निगरानी के लिए तैनात थे। इसके अलावा अयोध्या के विभिन्न बैंकों से ट्रस्ट कर्मचारियों और उनसे जुड़े लोगों के बैंक खातों का विवरण भी मांगा गया है।

मोबाइल फोन की होगी फोरेंसिक जांच

पुलिस को आशंका है कि गिरफ्तार आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन से व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्य डिलीट किए हैं। अब सभी आठ आरोपियों के मोबाइल फोरेंसिक जांच के लिए भेजे जाएंगे, ताकि हटाए गए डेटा को रिकवर कर मामले से जुड़े सबूत जुटाए जा सकें। सोमवार को सभी आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एंटी करप्शन कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 14 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस दौरान पुलिस ने किसी आरोपी की रिमांड नहीं मांगी।

नकदी, गहने और संपत्ति के दस्तावेज जब्त

पुलिस ने आरोपियों के घरों पर छापेमारी के दौरान जमीन की रजिस्ट्री, संपत्ति के दस्तावेज, बैंक पासबुक और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए हैं। कुछ आरोपियों के घरों से बड़ी मात्रा में नकदी, सोने-चांदी के गहने और उनकी खरीद की रसीदें भी मिली हैं। अब जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि क्या ये संपत्तियां और गहने कथित तौर पर चढ़ावे की रकम से खरीदे गए थे।

लवकुश मिश्रा की संपत्ति जांच के केंद्र में

जांच के दौरान पुलिस को आरोपी लवकुश मिश्रा की पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर अयोध्या के शहादतगंज इलाके में लगभग 1,000 वर्गफुट जमीन और उस पर बन रहे तीन मंजिला मकान की जानकारी मिली है। बताया जा रहा है कि अक्टूबर 2025 में खरीदी गई इस जमीन की कीमत करीब 25 लाख रुपये है, जबकि मकान के निर्माण पर 80 से 90 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। कुल निवेश लगभग डेढ़ करोड़ रुपये बताया जा रहा है। पड़ोसियों के अनुसार, तीन दिन पहले तक मकान का निर्माण कार्य जारी था, लेकिन जांच शुरू होने के बाद काम रोक दिया गया। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि लगभग 20 हजार रुपये मासिक आय वाले लवकुश मिश्रा ने इतनी बड़ी संपत्ति कैसे अर्जित की।

आठों आरोपियों पर क्या हैं आरोप?

एफआईआर के अनुसार, सभी आठ आरोपी चढ़ावे की गिनती और दानपात्रों के संचालन से जुड़ी प्रक्रिया में अलग-अलग जिम्मेदारियों पर तैनात थे। आरोप है कि दानपात्रों को काउंटिंग रूम तक पहुंचाने, नकदी की गिनती और निगरानी के दौरान करोड़ों रुपये के चढ़ावे में कथित हेराफेरी की गई। जांच के दौरान कुछ आरोपियों के घरों से लाखों रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं। पुलिस इन सभी की आय, संपत्ति और बैंक लेनदेन का मिलान कर रही है।

अज्ञात लोगों पर भी हो सकती है कार्रवाई

ट्रस्ट की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में आठ नामजद आरोपियों के अलावा कुछ अज्ञात लोगों का भी उल्लेख है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

चढ़ावा व्यवस्था में होंगे बड़े बदलाव

मामले के सामने आने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट चढ़ावा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित बदलावों में शामिल हैं—

  • श्रद्धालुओं के लिए QR कोड के माध्यम से डिजिटल चढ़ावे की सुविधा।
  • नकद चढ़ावे के लिए 20 दानपात्रों की जगह केवल एक दानपात्र की व्यवस्था।
  • सोना-चांदी के चढ़ावे को सरकारी टकसाल के माध्यम से सुरक्षित प्रक्रिया में शामिल करना।

इन प्रस्तावों पर 6 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

जांच लगातार हो रही व्यापक

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रशासनिक कार्रवाई, बैंक खातों की जांच, डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक पड़ताल और संपत्तियों के मनी ट्रेल की जांच के आधार पर आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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