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यूपी को मिलने जा रही विकास की नई रफ्तार, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन और दो नए हाईवे प्रोजेक्ट्स का होगा शिलान्यास

उत्तर प्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे एक्सप्रेसवे नेटवर्क के बीच राज्य को जल्द ही तीन बड़ी सड़क परियोजनाओं की सौगात मिलने वाली है। गंगा एक्सप्रेसवे के बाद अब प्रधानमंत्री Narendra Modi लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। इसके साथ ही दो नए हाईवे प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास भी किया जाएगा, जिनसे राज्य में कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को नया बल मिलने की उम्मीद है।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे से सफर होगा आसान

करीब 63 किलोमीटर लंबा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे लगभग 4,700 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। इस परियोजना में 42 किलोमीटर का ग्रीनफील्ड सेक्शन शामिल है। एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर लगने वाले जाम से राहत मिलेगी और लखनऊ से कानपुर की यात्रा का समय ढाई-तीन घंटे से घटकर लगभग 30 से 45 मिनट रह जाएगा। इस मार्ग पर वाहन 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल सकेंगे। प्रस्तावित टोल दरों के अनुसार कार चालकों को एक तरफ की यात्रा के लिए 275 रुपये और 24 घंटे के भीतर वापसी करने पर कुल 415 रुपये का भुगतान करना होगा।

112 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड हाईवे का निर्माण

प्रधानमंत्री मोदी जिन दो नई परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे, उनमें पहला कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे है। 112 किलोमीटर लंबे इस हाईवे के निर्माण पर 3,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है। यह मार्ग कानपुर से शुरू होकर फतेहपुर और हमीरपुर जिलों से गुजरेगा, जिससे क्षेत्रीय संपर्क और विकास को बढ़ावा मिलेगा।

बाराबंकी-बहराइच मार्ग होगा फोर-लेन

दूसरी परियोजना बाराबंकी-बहराइच मार्ग के विस्तार से जुड़ी है। वर्तमान में दो लेन वाले इस मार्ग को लगभग 7,000 करोड़ रुपये की लागत से चार लेन में विकसित किया जाएगा। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इसके तहत बहराइच में 140 एकड़ और बाराबंकी में 110 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जा रही है। इन दोनों परियोजनाओं से कानपुर, फतेहपुर, हमीरपुर, बाराबंकी और बहराइच सहित करीब आठ जिलों में उद्योग, व्यापार, परिवहन और रियल एस्टेट क्षेत्र को लाभ मिलने की संभावना है।

क्या होता है ग्रीनफील्ड हाईवे?

ग्रीनफील्ड हाईवे ऐसे नए मार्ग होते हैं, जिन्हें पूरी तरह नई जमीन पर विकसित किया जाता है। इनका निर्माण उन क्षेत्रों में किया जाता है जहां पहले कोई सड़क या बुनियादी परिवहन ढांचा मौजूद नहीं होता। ऐसे हाईवे आधुनिक डिजाइन के साथ तैयार किए जाते हैं और इनके किनारों पर बड़े पैमाने पर हरित क्षेत्र विकसित किए जाते हैं, जिससे पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।

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