शिक्षक दिवस पर PM मोदी का शिक्षकों से संवाद, बोले- नई पीढ़ी को तैयार करने में गुरु की भूमिका सबसे अहम

नई दिल्ली: शिक्षक दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के शिक्षकों के साथ विशेष संवाद किया। विदेश यात्रा से लौटने के बाद आयोजित इस कार्यक्रम में अलग-अलग राज्यों से आए शिक्षकों ने अपने अनुभव प्रधानमंत्री के साथ साझा किए। इस दौरान शिक्षा के बदलते स्वरूप, विद्यार्थियों के कौशल विकास और नई पीढ़ी को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि एक शिक्षक के पास विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और सोच को दिशा देने की बड़ी जिम्मेदारी होती है। उन्होंने शिक्षकों से बदलते समय के अनुरूप शिक्षण के तरीकों को विकसित करने और बच्चों की जरूरतों को समझकर उन्हें आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
बच्चों को सिर्फ किताबों तक सीमित न रखें
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों की भूमिका को केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षक विद्यार्थियों की जिज्ञासा, सोच और रचनात्मक क्षमता को विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बदलते दौर में बच्चों के सामने आने वाली चुनौतियों को देखते हुए शिक्षकों से अपेक्षा है कि वे विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बनाए रखें और उन्हें सही दिशा दिखाएं। पीएम मोदी का संदेश रहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन की वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयार करना भी है।
NEP में स्किल और रोजगार पर जोर
नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षा व्यवस्था में कौशल विकास और विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पारंपरिक विषयों के साथ व्यावहारिक और व्यावसायिक शिक्षा को भी बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। सरकार का जोर ऐसे पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण अवसर उपलब्ध कराने पर है, जिनसे विद्यार्थी अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार अलग-अलग कौशल विकसित कर सकें। इसका उद्देश्य पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों को भविष्य के रोजगार और स्वरोजगार के लिए तैयार करना है।
पढ़ाई के साथ प्रैक्टिकल अनुभव पर फोकस
नई शिक्षा नीति में पाठ्यक्रम को पहले की तुलना में अधिक लचीला बनाने की दिशा में काम किया गया है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान व्यावहारिक प्रशिक्षण और इंटर्नशिप जैसे अवसर देने पर जोर है, ताकि उन्हें वास्तविक कार्यक्षेत्र की जरूरतों को समझने का अनुभव मिल सके। इस बदलाव के साथ शिक्षकों की भूमिका भी लगातार बदल रही है। शिक्षकों को नई तकनीक, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और नई शिक्षा नीति के प्रावधानों से परिचित कराने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर भी जोर दिया जा रहा है।
शिक्षक ही तैयार करते हैं भविष्य की पीढ़ी
प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों के योगदान को राष्ट्र के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि एक शिक्षक के पास आने वाली पीढ़ी को आकार देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। ऐसे में शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था को बदलती तकनीक तथा समाज की नई जरूरतों के अनुरूप लगातार आगे बढ़ाना जरूरी है। शिक्षक दिवस पर आयोजित इस संवाद का मुख्य फोकस भी इसी सोच पर रहा कि देश के विद्यार्थी ज्ञान के साथ-साथ कौशल, आत्मविश्वास, व्यावहारिक समझ और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता हासिल करें।







