राहुल गांधी के मनुस्मृति वाले बयान पर भड़के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, बोले- माफी नहीं मांगी तो कांग्रेस के बहिष्कार की मुहिम चलाएंगे

नई दिल्ली: मनुस्मृति पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। अब ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बार-बार सनातन धर्मग्रंथों का अपमान करते हैं। शंकराचार्य ने कहा कि धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या राजनीतिक नफा-नुकसान को ध्यान में रखकर नहीं की जानी चाहिए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यदि राहुल गांधी को धर्मग्रंथों में लिखी किसी बात पर आपत्ति है तो उन्हें पहले धर्माचार्यों से चर्चा करनी चाहिए और उसका सही अर्थ समझना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धर्मग्रंथों के संबंध में बोलने से पहले उनके संदर्भ और अर्थ को समझना जरूरी है।
माफी नहीं मांगी तो बहिष्कार की मुहिम
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग करते हुए कहा कि अगर वह इसी तरह धर्मग्रंथों पर टिप्पणी करते रहे और क्षमा नहीं मांगी, तो हिंदुओं से कांग्रेस का बहिष्कार करने की अपील को लेकर मुहिम चलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि चाहे कोई भी राजनीतिक दल हो, उसे सनातन धर्मग्रंथों का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, धर्मग्रंथ श्रद्धा और सम्मान का केंद्र हैं और उनकी बातों को समझने के लिए धार्मिक परंपरा और संदर्भ का ज्ञान होना जरूरी है।
पुणे में राहुल गांधी ने की थी मनुस्मृति की आलोचना
दरअसल, राहुल गांधी ने हाल ही में पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में मनुस्मृति को लेकर टिप्पणी की थी। इसी बयान को लेकर अब संत समाज की ओर से विरोध सामने आया है।
महिलाओं की स्वतंत्रता को लेकर भी राहुल पर निशाना
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने महिलाओं की स्वतंत्रता से जुड़े राहुल गांधी के विचारों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों के सवाल को अलग-अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने मनुस्मृति में माता-पिता, पति और पुत्र की जिम्मेदारियों से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि परिवार में महिलाओं की सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी को गलत नहीं माना जाना चाहिए। शंकराचार्य ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण सवाल है और इस जिम्मेदारी को निभाना परिवार का दायित्व होना चाहिए। उन्होंने इसी संदर्भ में मनुस्मृति में दिए गए कुछ प्रावधानों का समर्थन करते हुए राहुल गांधी की टिप्पणी पर सवाल उठाए।



