उत्तर प्रदेश

प्रतापगढ़ में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में 315 करोड़ रुपये के बड़े घपले का खुलासा

डॉ राकेश वर्मा (पूर्व IAS)

प्रतापगढ़। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। कुंडा तहसील में फर्जी पंजीकरण के जरिए करीब 3.15 अरब रुपये (315 करोड़ रुपये) का घपला होने का आरोप लगा है। कृषि निदेशालय, दिल्ली और केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की जांच में यह खुलासा हुआ है।

जांच में पता चला है कि साढ़े चार लाख (लगभग 4.5 लाख) किसानों ने फर्जी तरीके से पंजीकरण कराया। इनमें कौशांबी, प्रयागराज, अमेठी और सुल्तानपुर जिलों के लोगों के नाम भी शामिल हैं। कई मामलों में बाहर के जिलों के निवासियों ने कुंडा तहसील की जमीन दिखाकर योजना का लाभ लिया।

यह पंजीकरण मुख्य रूप से 2019-2020 में पीएम किसान पोर्टल पर हुए थे। उस दौरान सत्यापन प्रक्रिया में भारी लापरवाही बरती गई और लगभग सभी आवेदकों को पात्र ठहरा दिया गया। जांच में लगभग 1700 आईपी एड्रेस भी फर्जी पाए गए हैं, जिनसे बड़े पैमाने पर एक ही जगह से कई फर्जी आवेदन भेजे गए।

वर्तमान में अभी भी 65,924 किसान जांच के दायरे में हैं और उनका सत्यापन चल रहा है। जिले के जिलाधिकारी (डीएम) ने इस मामले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) को एफआईआर दर्ज करने के लिए पत्र लिखा है। प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

यह घपला किसानों को सालाना 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने वाली केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना को प्रभावित करता है। योजना का मकसद छोटे और सीमांत किसानों को सीधा लाभ पहुंचाना है, लेकिन फर्जी पंजीकरण से असली पात्र किसानों का हक मारा गया और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा।

स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग अब सख्त सत्यापन अभियान चला रहे हैं। फर्जी लाभार्थियों की पहचान कर उनकी राशि वसूलने और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना है। इस मामले ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं में सत्यापन प्रक्रिया की मजबूती और डिजिटल निगरानी की जरूरत को रेखांकित किया है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना के पात्रता मानदंड

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को प्रति वर्ष ₹6,000 की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों (प्रत्येक ₹2,000) में सीधे बैंक खाते में दी जाती है।

पात्र कौन हैं?

1. भूमिधारक किसान परिवार: जिनके नाम पर राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के भूमि अभिलेखों में कृषि योग्य भूमि दर्ज हो।

2. परिवार की परिभाषाः पति, पत्नी और अवयस्क (नाबालिग) बच्चे। एक परिवार को केवल एक इकाई माना जाता है।

3. भूमि का आकारः कोई ऊपरी सीमा नहीं है (2019 के बाद सभी भूमिधारक किसान पात्र हैं)।

4. नागरिकताः केवल भारतीय नागरिक।

5. भूमि स्वामित्वः सामान्यतः 1 फरवरी 2019 से पहले की भूमि पर पात्रता होती है। बाद में खरीदी गई भूमि के मामलों में सत्यापन के बाद फैसला लिया जाता है।

6. आधार कार्ड, e-KYC पूरा होना और बैंक खाता आधार से लिंक होना अनिवार्य है। अपात्र कौन हैं? (Exclusion Categories) निम्नलिखित श्रेणियों के लोग योजना का लाभ नहीं ले सकतेः

1. संस्थागत भूमिधारक (किसी संस्था, ट्रस्ट, कंपनी आदि के नाम पर जमीन)।

2. संवैधानिक पद के वर्तमान या पूर्व धारक (राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति आदि)।

3. राजनीतिक पद के वर्तमान या पूर्व धारकः

मंत्री / राज्य मंत्री

लोकसभा / राज्यसभा / विधानसभा / विधान परिषद के सदस्य

नगर निगम के मेयर

जिला पंचायत के अध्यक्ष

4. सरकारी कर्मचारी:

केंद्र या राज्य सरकार के सेवारत या सेवानिवृत्त अधिकारी/कर्मचारी

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) और स्वायत्त निकायों के कर्मचारी (अपवादः मल्टी-टास्किंग स्टाफ / Group D / Class IV कर्मचारी पात्र हैं)

5. छोड़कर) पेंशनभोगीः जिनकी मासिक पेंशन ₹10,000 या उससे अधिक है (Group D / Class IV को

6. आयकरदाताः पिछले आकलन वर्ष में आयकर चुकाने वाले व्यक्ति।

7. पंजीकृत पेशेवरः डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट, आर्किटेक्ट आदि। महत्वपूर्ण बातें

किरायेदार किसान (Tenant), बटाईदार या खेतिहर मजदूर जिनका नाम भूमि अभिलेखों में नहीं है, वे पात्र नहीं हैं।

एक परिवार से केवल एक सदस्य को लाभ मिलता है। पति-पत्नी दोनों या परिवार के कई सदस्यों के नाम पर लाभ नहीं दिया जाता।

e-KYC अनिवार्य है। बिना e-KYC के किस्त नहीं मिलती। आधिकारिक जानकारी के लिए हमेशा pmkisan.gov.in वेबसाइट या PM-KISAN मोबाइल ऐप पर “Know Your Status” चेक करें।

जांच आगे बढ़ने के साथ और खुलासे होने की उम्मीद है। प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे फर्जीवाड़े की कोई जानकारी होने पर संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

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