उत्तर प्रदेशप्रदेश

बुज़ुर्ग-बच्चे तक चोटिल, Jaypee Wish Town के हालात पर फूटा लोगों का ग़ुस्सा

नोएडा।  कभी राजधानी क्षेत्र का सबसे चर्चित टाउनशिप प्रोजेक्ट कहे जाने वाला Jaypee Wish Town आज अपने ही निवासियों के लिए अभिशाप बन चुका है। जिन घरों को लोग लाखों-करोड़ों रुपये देकर “सपनों का घर” समझकर लाए थे, वे अब खंडहर जैसे जर्जर टावरों में तब्दील हो गए हैं। रविवार को Wish Town की कई सोसाइटीज़ – जेपी अमन, क्लासिक, कॉस्मॉस, कैलिप्सो, जेपी पैवेलियन और अन्य – के सैकड़ों निवासी सेक्टर-134 स्थित गुलशन मॉल के पास एकजुट हुए। United Societies for Welfare के बैनर तले हुए इस विरोध में लोगों का गुस्सा साफ झलक रहा था।

जर्जर टावरों का डरावना हाल

टूटते छज्जे और गिरता प्लास्टर: कई जगहों से दीवारें और छज्जे झड़ रहे हैं। कुछ दिनों पहले एक बुज़ुर्ग पर गिरते प्लास्टर से चोट आई, वहीं खेलते बच्चों को भी कई बार गिरते मलबे ने घायल किया है।

सीलन और दरारें: दस साल से पेंटिंग-रिप्लास्टरिंग न होने से टावरों में सीलन और दरारें लगातार बढ़ रही हैं।

बेसमेंट में पानी और रिसाव: लगातार पानी भरने से पार्किंग और स्ट्रक्चर दोनों खतरे में हैं।

बुनियादी सुविधाएँ नदारद

पानी: पाइपलाइन और ओवरहेड टैंक से रिसाव, अनियमित सप्लाई।

बिजली बैकअप: बार-बार फेल होता है, गर्मी में परिवार बेहाल।

लिफ्ट: हर हफ्ते खराब, महीनों तक मरम्मत लटकी रहती है।

फायर सेफ्टी: अलार्म, स्प्रिंकलर और अग्निशामक सब बेकार। कोई मॉक ड्रिल तक नहीं।

सुरक्षा: प्रशिक्षित गार्डों की कमी, विज़िटर मैनेजमेंट नाम मात्र।

साफ-सफाई: लॉबी, कॉरिडोर और बेसमेंट की हालत बदबूदार और अस्वच्छ।

मेंटेनेंस का पैसा कहाँ गया?

निवासियों का कहना है कि वे हर महीने भारी-भरकम मेंटेनेंस चार्ज जमा करते हैं। करोड़ों रुपये सालों में वसूले गए, लेकिन न तो हिसाब दिया गया और न ही सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं। “हम पैसे भी दें, चोट भी खाएँ और फिर भी सुविधा न मिले – यह डबल लूट है,” भरत परमार -Aman सोसायटी, गुस्साए निवासी ने कहा।

रेसिडेंट्स का बयान बयान

रिज़वान आलम (Kosmos सोसाइटी):

“हम अपने घरों में सम्मानजनक जीवन चाहते थे, लेकिन यहाँ तो रोज़ डर के साए में जीना पड़ता है। गिरता प्लास्टर, टूटी दीवारें और गंदगी – यह घर नहीं, कंक्रीट की जेल बन गए हैं। बिल्डर की यह लापरवाही अब और बर्दाश्त नहीं होगी।”

प्रदीप द्विवेदी (Kosmos सोसाइटी)

“मेंटेनेंस चार्ज समय पर लिया जाता है, लेकिन सुविधाएँ गायब हैं। बुज़ुर्ग और बच्चे घायल हो रहे हैं, फिर भी Suraksha Builder आंख मूंदे बैठा है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, सीधा धोखा है।”

 गुस्से की लहर और अगली चेतावनी

विरोध प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन नारे और तख्तियों पर निवासियों का आक्रोश साफ झलक रहा था – “सुरक्षा बिल्डर होश में आओ”, “सपनों का घर कब तक खंडहर रहेगा?”, “मेंटेनेंस दो या जवाब दो।”

निवासियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो यह आंदोलन नोएडा की सबसे बड़ी हाउसिंग लड़ाई बन जाएगा और इसकी गूंज प्रशासन, न्यायालय और मंत्रालय तक जाएगी।

निष्कर्ष

Jaypee Wish Town के निवासियों का यह आंदोलन एक सपनों से टूटे विश्वास की कहानी है। एक ओर गिरते छज्जों और चोट खाते बच्चों की असलियत है, दूसरी ओर बिल्डर और प्राधिकरण की चुप्पी। अब निवासियों ने साफ कह दिया है – **“या तो हमें सुरक्षित और सम्मानजनक घर दो, वरना यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं।”

प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित रहा

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे निवासी नेताओं – राहुल गुप्ता, प्रदीप द्विवेदी, रिज़वान आलम, भारत परमार, हेमंत परमार, अरुण कुमार, गौरव शुक्ला और राकेश सिंह ने कहा: “हम सालों से व्यक्तिगत स्तर पर लड़ रहे थे, पर अब सभी सोसायटी एकजुट हैं। हमारी आवाज़ अब दबाई नहीं जा सकती।”

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