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PM मोदी की मां पर टिप्पणी को लेकर राहुल गांधी पर बरसे CM धामी, बोले- राजनीति में भी मर्यादा जरूरी

देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत मां को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी और उस दौरान राहुल गांधी के हंसने को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन मां को राजनीति का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्य समाज में मां के अपमान को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

मुख्यमंत्री धामी ने राहुल गांधी से राजनीतिक विरोध के दौरान भाषा और व्यवहार की मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की मां को लेकर की गई टिप्पणी पर उपहास या हंसी लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक संस्कारों के अनुरूप नहीं है।

‘राजनीतिक विरोध की भी एक सीमा होती है’

सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री की स्वर्गीय माताजी को लेकर अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी टिप्पणी के दौरान हंसना राजनीतिक संस्कारों पर ही सवाल खड़े करता है। धामी ने कहा कि राजनीतिक विरोध के नाम पर मर्यादा की सीमाएं पार करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि देश की मातृशक्ति इस तरह की घटनाओं को देख रही है और इस तरह का व्यवहार समाज में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

अजीत डोभाल पर राहुल गांधी की भाषा को लेकर भी हमला

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे बेहद निंदनीय बताते हुए कहा कि देश की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पद पर लंबे समय तक जिम्मेदारी निभाने वाले व्यक्ति के प्रति भी सम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल होना चाहिए।

धामी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की टिप्पणी कांग्रेस की राजनीतिक सोच को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में दशकों तक योगदान देने वाले व्यक्ति के लिए इस्तेमाल की गई भाषा राजनीतिक मर्यादा के अनुरूप नहीं है।

‘देवभूमि अपने सपूतों का अपमान स्वीकार नहीं करेगी’

मुख्यमंत्री धामी ने अजीत डोभाल का उत्तराखंड से जुड़ा होने का उल्लेख करते हुए कहा कि देवभूमि अपने सपूतों का सम्मान करना जानती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता अपने लोगों के सम्मान के साथ खड़ी रहती है और किसी भी तरह के अपमान का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा।

धामी ने कहा कि राजनीतिक दलों और नेताओं को विरोध करते समय भाषा की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों का ध्यान रखना चाहिए। उनके मुताबिक, राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर टिप्पणी करना राजनीतिक संवाद की मर्यादा को प्रभावित करता है।

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