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3 उपचुनावों में बीजेपी को 2 सीटों पर झटका, अध्यक्ष नितिन नवीन बोले- ‘जनादेश स्वीकार, हार का करेंगे आत्ममंथन’

गुजरात, बिहार और मध्य प्रदेश की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजों पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। तीन सीटों में भाजपा को केवल गुजरात की मांजलपुर सीट पर जीत मिली, जबकि बिहार की बांकीपुर और मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर हार का सामना करना पड़ा।

अपने एक्स पोस्ट में नितिन नवीन ने कहा, “तीनों विधानसभा उपचुनावों के जनादेश को हम विनम्रता से स्वीकार करते हैं। गुजरात की मांजलपुर विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी पर विश्वास जताने के लिए वहां की जनता का हृदय से आभार। इस जीत के लिए पार्टी के सभी समर्पित कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को हार्दिक बधाई।” उन्होंने आगे लिखा, “बांकीपुर और दतिया में हमें अपेक्षित जनादेश नहीं मिला। इन दोनों सीटों के चुनाव परिणामों का हम गंभीरता से आत्ममंथन करेंगे और नई ऊर्जा व संकल्प के साथ जनता के बीच जाकर उनका विश्वास और मजबूत करने का प्रयास करेंगे।”

मांजलपुर में बीजेपी की बड़ी जीत

गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार सतेन्द्रभाई पटेल ने शानदार जीत दर्ज की। उन्हें 55,481 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के भीखाभाई रबारी को 24,851 वोट प्राप्त हुए। भाजपा ने यह सीट 30,630 वोटों के बड़े अंतर से अपने नाम की।

बांकीपुर में प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने जीत हासिल की। उन्हें 64,151 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार को 44,827 वोट प्राप्त हुए। प्रशांत किशोर ने 19,324 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। यह जीत जन सुराज पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी। इस जीत के साथ अब जन सुराज का विधानसभा में पहला विधायक होगा।

दतिया में कांग्रेस ने बीजेपी को हराया

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने जीत दर्ज की। उन्हें 66,757 वोट मिले, जबकि भाजपा के आशुतोष तिवारी को 60,741 वोट प्राप्त हुए। कांग्रेस ने यह सीट 6,016 वोटों के अंतर से अपने नाम की। तीनों उपचुनावों के नतीजों ने भाजपा के लिए मिश्रित तस्वीर पेश की है। एक ओर गुजरात में पार्टी ने अपना गढ़ बरकरार रखा, वहीं बिहार और मध्य प्रदेश में मिली हार ने आगामी चुनावों से पहले संगठन के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

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