अन्तर्राष्ट्रीय

ट्रंप ने फोड़ा टैरिफ बम, भारत समेत 17 देशों पर 10% आयात शुल्क लागू, जबरन श्रम से बने उत्पादों पर अमेरिका सख्त

नई दिल्ली। अमेरिका ने जबरन श्रम से तैयार किए गए उत्पादों के खिलाफ बड़ा व्यापारिक कदम उठाते हुए भारत सहित 17 देशों से आयात होने वाले कुछ सामानों पर नया टैरिफ लागू कर दिया है। अमेरिकी प्रशासन ने इन उत्पादों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है। भारत को राहत देते हुए 10 प्रतिशत शुल्क वाली श्रेणी में रखा गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत यह कार्रवाई करते हुए कुल 60 वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को दायरे में लिया है। नई शुल्क व्यवस्था 24 जुलाई 2026 से प्रभावी हो चुकी है।

जबरन श्रम से बने उत्पादों पर कार्रवाई

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि जिन उत्पादों पर यह कार्रवाई की गई है, उनके निर्माण में जबरन मजदूरी के इस्तेमाल की आशंका है। USTR के मुताबिक, अमेरिका लंबे समय से ऐसे उत्पादों के आयात को लेकर सख्त नीति अपनाता रहा है और अब अन्य व्यापारिक साझेदार देशों से भी इसी तरह के मानकों का पालन करने की अपेक्षा की जा रही है।

भारत को मिली आंशिक राहत

सूत्रों के अनुसार, शुरुआती प्रस्ताव में भारत को अधिक जोखिम वाली श्रेणी में रखते हुए 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाने की तैयारी थी। हालांकि भारत सरकार ने जून 2026 में विदेश व्यापार नीति में संशोधन करते हुए जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच श्रम मानकों को लेकर हुई सकारात्मक बातचीत और भारत के नीतिगत बदलाव को ध्यान में रखते हुए अमेरिका ने भारत को 10 प्रतिशत शुल्क वाले समूह में शामिल कर दिया। इस श्रेणी में कनाडा, ब्रिटेन, बांग्लादेश और पाकिस्तान समेत कुल 17 देश शामिल हैं।

ट्रंप प्रशासन की नई रणनीति

यह फैसला ऐसे समय आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आपातकालीन शक्तियों के तहत लागू किया गया अस्थायी 10 प्रतिशत वैश्विक शुल्क समाप्त होने वाला था। इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ को असंवैधानिक करार दिया था। इसके बाद प्रशासन ने अंतरिम व्यवस्था के तहत सभी देशों पर अस्थायी शुल्क लागू किया और समानांतर रूप से धारा 301 के तहत नई जांच प्रक्रिया शुरू की।

भारत ने जताई आपत्ति

भारत सरकार ने अमेरिकी जांच और एकतरफा शुल्क नीति पर असहमति जताई है। भारत का कहना है कि व्यापार से जुड़े ऐसे संवेदनशील मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए, न कि एकतरफा फैसलों के माध्यम से।

निर्यात पर पड़ सकता है असर

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार और प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 141 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था, जिसमें भारत का निर्यात करीब 87.3 अरब डॉलर रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि नए आयात शुल्क का असर भारतीय निर्यातकों, विशेषकर उन उद्योगों पर पड़ सकता है जिनका अमेरिकी बाजार पर अधिक निर्भरता है।

Show More

Related Articles

Back to top button
Close
Close