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‘सनातन का पुनर्जागरण चल रहा है’, VHP बैठक में बोले धामी; अर्धकुंभ, UCC और मदरसा बोर्ड पर रखी सरकार की बात

हरिद्वार में आयोजित विश्व हिन्दू परिषद (VHP) के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक के दूसरे दिन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य सरकार की नीतियों, सनातन संस्कृति, अर्धकुंभ की तैयारियों और देवभूमि के सांस्कृतिक स्वरूप को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी।

भूपतवाला में संतों और परिषद पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय को सनातन धर्म के पुनर्जागरण का दौर कहा जा सकता है। उनके अनुसार, समाज की सांस्कृतिक चेतना और धार्मिक एकजुटता ने देश को नई दिशा देने का काम किया है, जिसमें विश्व हिन्दू परिषद की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनवरी 2027 में होने वाले अर्धकुंभ की तैयारियों को लेकर सरकार गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने माना कि कुंभ और अर्धकुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों की गरिमा संत समाज के मार्गदर्शन और सहयोग से ही संभव हो पाती है।

उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है और दुनिया के कई देश भारत की प्रगति को नए नजरिए से देख रहे हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, किसी भी राष्ट्र की वास्तविक ताकत उसकी सामाजिक एकता और सांस्कृतिक आत्मविश्वास में निहित होती है।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कुछ राजनीतिक दलों पर सनातन परंपराओं को लेकर लगातार टिप्पणी करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि यह लंबे सामाजिक और धार्मिक आंदोलन का परिणाम है, जिसमें विभिन्न संगठनों और संत समाज का बड़ा योगदान रहा।

देवभूमि उत्तराखंड के संदर्भ में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य की आध्यात्मिक पहचान को सुरक्षित रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या संतुलन में बदलाव और अवैध अतिक्रमण जैसी चुनौतियों को देखते हुए सरकार कानून के दायरे में कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने का अभियान आगे भी जारी रहेगा।

समान नागरिक संहिता (UCC) का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड इस दिशा में पहल करने वाले राज्यों में अग्रणी बना है। उनका मानना है कि आने वाले समय में दूसरे राज्य भी इस मॉडल पर विचार कर सकते हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नई शैक्षिक संरचना लागू करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि एक जुलाई 2026 से नई व्यवस्था प्रभावी होने के बाद वर्तमान मदरसा बोर्ड स्वतः समाप्त हो जाएगा और उसकी जगह नई प्रशासनिक एवं शैक्षिक प्रणाली लागू की जाएगी।

मुख्यमंत्री के संबोधन में सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक आयोजनों की तैयारी और राज्य की नीतियों को लेकर सरकार के दृष्टिकोण की स्पष्ट झलक देखने को मिली।

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