ईरान ने भारतीय टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की दी अनुमति, ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भारत को राहत

इजरायल, संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब 13वें दिन में पहुंच गया है। वैश्विक ऊर्जा संकट की बढ़ती आशंकाओं के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने भारत के झंडे वाले टैंकरों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे दी है। सूत्रों के मुताबिक यह सहमति एस. जयशंकर और अब्बास अराघची के बीच हुई बातचीत के बाद बनी है।
भारतीय टैंकर सुरक्षित पार हुए
जानकारी के अनुसार कम से कम दो भारतीय टैंकर — पुष्पक और परिमल — इस अहम समुद्री मार्ग से सुरक्षित गुजर चुके हैं। हालांकि अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों पर अभी भी रोक जारी है। इससे पहले सऊदी अरब का कच्चा तेल लेकर जा रहा लाइबेरिया के झंडे वाला एक टैंकर, जिसका कप्तान भारतीय था, दो दिन पहले इसी मार्ग से गुजरकर मुंबई पोर्ट पहुंचा था। हालिया तनाव के बाद इस जलमार्ग से भारत पहुंचने वाला यह पहला जहाज माना जा रहा है। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमलों के बाद यहां समुद्री यातायात लगभग रुक गया था।
होर्मुज जलडमरूमध्य, ईरान और ओमान के बीच लगभग 55 किलोमीटर चौड़ा समुद्री मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। यह वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त शिपिंग मार्गों में से एक है। आमतौर पर हर दिन करीब 13 मिलियन बैरल तेल इसी रास्ते से गुजरता है, जो दुनिया में समुद्री मार्ग से होने वाले कुल तेल परिवहन का लगभग 31 प्रतिशत है। यदि इस मार्ग पर आवाजाही रुकती है तो इराक, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के प्रमुख बंदरगाहों पर भी बड़ा असर पड़ता है।
ईरान का बयान
ईरान का कहना है कि दुनिया की बड़ी मात्रा में लिक्विफाइड नैचुरल गैस भी इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है। ऐसे में यदि थोड़े समय के लिए भी यह मार्ग बाधित होता है तो इसका असर वैश्विक वित्तीय बाजारों, सप्लाई चेन और घरेलू बजट पर पड़ सकता है। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो जहाज अमेरिका और इजरायल के हितों के लिए काम कर रहे हैं, वे इस मार्ग से सुरक्षित रूप से नहीं गुजर सकेंगे।







