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हिन्दी राष्ट्र की बिन्दी, फिर भी आज तक हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा आखिर क्यों नहीं?

लेखक:
डॉ जयशंकर प्रसाद शुक्ल
वरिष्ठ पत्रकार
लखनऊ

हम कहते हैं हिन्दी राष्ट्र की बिन्दी है। फिर भी आज तक हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं मिल पाया। जबकि हमारा देश अंग्रेजों के चंगुल से 15 अगस्त 19 47 को आजाद हुआ। तब से हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। 26 नवंबर 1949 के दिन ही संविधान सभा द्वारा भारत के संविधान को अपनाया गया था,और 26 जनवरी 1950 में गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।

भारत में हिन्दी दिवस आते ही, ख़ासतौर पर उत्तर भारत के विभिन्न सरकारी एवं अर्धसरकारी विभागों में हिन्दी पर गोष्ठी, संगोष्ठी एवं कार्यशाला आयोजित किया जाता है। भारत में *One Nation One Election* की बात हो रही है लेकिन कोई भी राजनेता Only *One Nation One Hindi Nation Language* की बात नही कर रहा है।

*14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने अनुच्छेद 343 के तहत हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया।* हम हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस इसलिए मनाते हैं क्योंकि इसी दिन 1949 में भारतीय संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी गई हिंदी को देश की राजभाषा (आधिकारिक भाषा) के रूप में स्वीकार किया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 14 सितंबर 1953 को पहली बार हिंदी दिवस मनाए जाने की घोषणा की। इस दिन का मुख्य उद्देश्य लोगों को अपनी मातृभाषा के प्रति जागरूक करना और इसके सम्मान को बढ़ावा देना है।

हिंदी भाषा भारत की प्रमुख, सरल और सबसे अधिक बोली जाने वाली राजभाषा है। इसे देवनागरी लिपि में लिखा जाता है, जो बाएं से दाईं ओर चलती है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा घोषित किया था। हर साल 14 सितंबर को ‘हिंदी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। हिंदी दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली प्रमुख भाषाओं में शामिल है। इसीलिए 10जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस भी मनाया जाता है। यह भाषा हमारी सांस्कृतिक एकता और प्राचीन परंपराओं की पहचान है। यह देश के विभिन्न राज्यों और संस्कृतियों के लोगों को आपस में जोड़ती है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को एकजुट करने के लिए हिन्दी को अपनाया था।
हमें अपनी मातृ भाषा हिन्दी का सम्मान करना चाहिए और इसके प्रचार-प्रसार में सहयोग देना चाहिए।

राजभाषा (Official Language) वह भाषा है जिसका प्रयोग किसी देश या राज्य के सरकारी कामकाज, प्रशासनिक कार्यों और अदालतों में होता है, जबकि राष्ट्रभाषा (National Language) वह भाषा है जो देश के बहुसंख्यक लोगों द्वारा बोलचाल और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के रूप में उपयोग की जाती है। हिंदी भाषा की मुख्य रूप से 17 बोली मानी जाती हैं, जिन्हें सुविधा की दृष्टि से पांच उप-भाषाओं में बांटा गया है।

*हिन्दी की 17 प्रमुख बोलियां इन पांच उप-भाषाओं के तहत् आती हैं:*
*पश्चिमी हिन्दी (5 बोली) खड़ी बोली*
(कौरवी)
ब्रजभाषा
कन्नौजी
बुंदेली
हरयाणवी (बांगरू)

*पूर्वी हिन्दी (3 बोली)*
अवधी
बघेली
छत्तीसगढ़ी

*राजस्थानी हिन्दी (4 बोली)*

जयपुरी (ढूढंड़ी)
मारवाड़ी
मेवाती
मालवी

*पहाड़ी हिन्दी (3 बोली)*
कुमाऊंनी
गढ़वाली
नेपाली

*बिहारी हिन्दी (3 बोली)*

भोजपुरी
मगही
मैथिली

भारत के विभिन्न राज्यों में अपनी-अपनी क्षेत्रीय भाषा है। कहीं गुजराती मराठी, तमिल,राजस्थानी,

असमिया,कन्नड़,तेलुगू बंगाली, पंजाबी ऐसी तमाम क्षेत्रीय भाषाएं हैं। ऐसे में देश के किसी कोने में अगर हिन्दी भाषी जाते हैं, तो उन्हें हेय दृष्टि से देखा जाता है और कई बार तो देखने और सुनने को मिला है कि उन पर तंज़ कसते हुए जानलेवा प्रहार किया जाता है। जबकि वह भी भारत के ही नागरिक हैं। भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में हिन्दी सर्वाधिक बोली जाती है। इसीलिए 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस मनाया जाता है। फिर भी भारत में ही हिंदी भाषी राज्यों की भारत के अन्य राज्यों में अवहेलना की जाती है। जबकि यह संवैधानिक रूप से असंवैधानिक है। भारत में यदि हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दे दिया जाए तो भारत के हर राज्य में हिन्दी भाषियों को इस तरीके से सौतेले व्यवहार का कोप-भाजन नहीं होना पड़ेगा।

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