पंजाब में नशा मुक्ति अभियान का बड़ा आंकड़ा: साढ़े 4 साल में खरीदी गईं 43 करोड़ से ज्यादा दवाएं, 3.17 लाख मरीज इलाज से जुड़े

पंजाब में नशे की लत के इलाज को लेकर सरकारी प्रयासों की तस्वीर सामने आई है। सार्वजनिक उपक्रमों पर बनी समिति की वर्ष 2026-27 की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साढ़े चार वर्षों में पंजाब हेल्थ सिस्टम्स कॉरपोरेशन ने नशा मुक्ति उपचार के लिए 43 करोड़ से अधिक ब्यूप्रेनॉर्फिन टैबलेट खरीदी हैं। इन दवाओं की आपूर्ति राज्यभर के सरकारी आउटपेशेंट ओपिऑयड असिस्टेड ट्रीटमेंट (OOAT) क्लिनिकों में की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, ब्यूप्रेनॉर्फिन की खरीद केवल पंजाब हेल्थ सिस्टम्स कॉरपोरेशन के माध्यम से की जाती है। वर्ष 2022 में 7 करोड़, 2023 में 9.44 करोड़, 2024 में 10 करोड़ और 2025 में 11 करोड़ टैबलेट खरीदी गईं। वहीं, 2026 में जून तक 6 करोड़ टैबलेट की खरीद दर्ज की गई है।
इलाज कराने वालों की संख्या में बढ़ोतरी
रिपोर्ट में बताया गया है कि नशे के खिलाफ कार्रवाई और अवैध सप्लाई नेटवर्क पर शिकंजा कसने के बाद बड़ी संख्या में नशे की लत से जूझ रहे लोग सरकारी उपचार केंद्रों का रुख करने लगे। इसके चलते इलाज के लिए पंजीकृत मरीजों की संख्या 2022 के लगभग 2 लाख से बढ़कर 3.17 लाख तक पहुंच गई है।
जेलों में भी चल रहा नशा मुक्ति अभियान
सरकार ने नशा मुक्ति सेवाओं का विस्तार जेलों तक भी किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2022 से अब तक जेलों में संचालित OOAT क्लिनिकों को 88.19 लाख ब्यूप्रेनॉर्फिन टैबलेट उपलब्ध कराई गई हैं। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि नशे की लत से जूझ रहे कैदियों के उपचार के लिए जेलों में विशेष क्लिनिक स्थापित किए गए हैं, जहां मनोचिकित्सक, काउंसलर और अन्य विशेषज्ञ सेवाएं दे रहे हैं।
40 हजार से अधिक कैदी उपचार से जुड़े
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 से अब तक पंजाब की जेलों में संचालित OOAT क्लिनिकों में 40,830 कैदियों का पंजीकरण किया गया है। इससे स्पष्ट है कि राज्य का नशा मुक्ति अभियान केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि जेलों में बंद नशे की लत से जूझ रहे कैदियों को भी उपचार व्यवस्था से जोड़ा गया है।







