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दिल्ली-NCR में छिपा था लश्कर का आतंकी ‘राजा’, पहचान बदलने के लिए कराया हेयर ट्रांसप्लांट और डेंटल ट्रीटमेंट

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने लश्कर-ए-तैयबा के एक खूंखार आतंकी शब्बीर अहमद लोन उर्फ ‘राजा’ को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि यह आतंकी दिल्ली-NCR में रहकर अपनी पहचान बदलने की कोशिश कर रहा था। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, उसने गुरुग्राम में हेयर ट्रांसप्लांट और डेंटल ट्रीटमेंट कराकर अपना हुलिया बदलने की साजिश रची थी, ताकि वह खुफिया एजेंसियों की नजरों से बच सके।

पहचान बदलने की थी साजिश

खुफिया सूत्रों के अनुसार, श्रीनगर के कंगन का रहने वाला शब्बीर अहमद लोन लंबे समय से भूमिगत था और अपनी असली पहचान मिटाने की कोशिश कर रहा था। इसी मकसद से उसने गुरुग्राम के एक डॉक्टर से संपर्क कर करीब 1.5 लाख रुपये खर्च कर हेयर ट्रांसप्लांट कराया। जांच एजेंसियों का मानना है कि वह कॉरपोरेट लुक अपनाकर सुरक्षा जांच और सीसीटीवी कैमरों से बचना चाहता था। इसके अलावा उसने गुरुग्राम के एक डेंटिस्ट से दांतों का इलाज और कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट भी कराया, ताकि उसका चेहरा पूरी तरह बदल जाए।

हाफिज सईद से जुड़े होने का दावा

जांच में यह भी सामने आया है कि शब्बीर अहमद लोन का संबंध लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक Hafiz Saeed से रहा है। बताया जा रहा है कि वह पाकिस्तान में हथियारों की ट्रेनिंग भी ले चुका है। साल 2005 में उसे पहली बार गिरफ्तार किया गया था, जब वह दिल्ली में फिदायीन हमले की साजिश में शामिल पाया गया था। जेल से रिहा होने के बाद वह कथित तौर पर बांग्लादेश भाग गया, जहां से उसने भारत विरोधी गतिविधियों और स्लीपर सेल नेटवर्क को फिर से सक्रिय करने की कोशिश की।

पोस्टर से खुला नेटवर्क का सुराग

हाल ही में दिल्ली और कोलकाता में कई संवेदनशील स्थानों पर भारत-विरोधी पोस्टर लगाए गए थे। इसके बाद स्पेशल सेल की NDR यूनिट और केंद्रीय एजेंसियों ने जांच शुरू की। जांच के दौरान नेटवर्क की कड़ियां बांग्लादेश में बैठे शब्बीर अहमद लोन तक पहुंचीं। इसके बाद एक गोपनीय अभियान चलाकर उसे दिल्ली सीमा के पास से गिरफ्तार कर लिया गया।

डॉक्टरों और क्लिनिक स्टाफ से भी होगी पूछताछ

फिलहाल स्पेशल सेल आरोपी से पूछताछ कर रही है। पुलिस अब उन डॉक्टरों और क्लिनिक कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच करेगी, जिन्होंने उसका इलाज किया था। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इलाज के दौरान उन्हें आरोपी की असली पहचान की जानकारी थी या नहीं।

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