कानपुर ‘किडनी कांड’ में बड़ा खुलासा, 12वीं पास शख्स ने किए 13 अवैध ट्रांसप्लांट

कानपुर का चर्चित ‘किडनी कांड’ इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला बनकर सामने आया है, जहां लोगों की जान से खिलवाड़ कर अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट किए गए। इस मामले में पुलिस की गिरफ्त में आए ओटी मैनेजर मुदस्सर अली सिद्दीकी उर्फ ‘डॉ अली’ ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
जानकारी के मुताबिक, थाना रावतपुर में दर्ज एफआईआर में शुरुआत में मुदस्सर अली का नाम शामिल नहीं था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर उसे आरोपी बनाया गया। 16 मार्च को उसे कानपुर कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया। बाद में पुलिस रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में उसके अवैध कामों का पर्दाफाश हुआ।
पूछताछ में अली ने कबूल किया कि उसने बिना किसी मेडिकल डिग्री के अब तक 13 किडनी ट्रांसप्लांट किए। इनमें से 3 ऑपरेशन मेरठ में और 10 कानपुर के अलग-अलग अस्पतालों में किए गए। इन अवैध ऑपरेशनों के दौरान दो मरीजों की मौत भी हो चुकी है।
जांच में सामने आया कि अली मूल रूप से दिल्ली के उत्तम नगर का रहने वाला है और मेरठ के एक अस्पताल में ओटी मैनेजर के रूप में काम करते हुए उसने ऑपरेशन करना सीखा। इसके बाद उसने रोहित तिवारी नाम के व्यक्ति के साथ मिलकर एक गिरोह बना लिया और कानपुर के कई निजी अस्पतालों में अवैध ट्रांसप्लांट का नेटवर्क खड़ा कर लिया।
पुलिस के अनुसार, केशवपुरम स्थित आहूजा अस्पताल, मेडलाइफ अस्पताल और स्वरूप नगर के रमाशिव अस्पताल में इन गैरकानूनी ऑपरेशनों को अंजाम दिया गया। साल 2023 में एक मरीज की मौत रमाशिव अस्पताल में हुई थी, जबकि नवंबर 2025 में मेडलाइफ अस्पताल में ट्रांसप्लांट के बाद एक महिला की बाद में दिल्ली के अस्पताल में मौत हो गई।
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की बड़ी विफलता को उजागर करता है। अब तक इस मामले में डॉक्टर दंपती सहित 11 लोगों को जेल भेजा जा चुका है। पुलिस गिरोह के सरगना रोहित तिवारी और कथित दलाल शिवम अग्रवाल को रिमांड पर लेकर आगे की जांच की तैयारी कर रही है, ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का भी पर्दाफाश किया जा सके।







