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बच्चों में वैज्ञानिक शोध की प्रवृत्ति का विकास करें शिक्षक : स्वरूप मंडल

लखनऊ। आंचलिक विज्ञान नगरी के प्रमुख स्वरूप मंडल ने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे बच्चों में वैज्ञानिक प्रवृत्ति का विकास करने में सहायक बनें। वे राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में पंजीकरण के लिए गुरुवार को यहां आयोजित शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने उपस्थित शिक्षकों से कहा कि वे अपने विद्यार्थियों को यहां भ्रमण के लिए भेजें जिससे वे वैज्ञानिक सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप में समझ सकेंगे। मुख्य अतिथि के रूप में आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या के प्रो. डी. राम ने कहाकि बच्चों को कम लागत वाली तकनीक विकसित करने की ओर हमें प्रोत्साहित करना होगा।

मुख्य वक्ता डॉ. आरके मित्रा ने कहा कि शिक्षकों को वैज्ञानिक सोच वाले बच्चों की पहचान करनी चाहिए और उन्हें आगे बढ़ाने में सहयोग देना चाहिए। नोडल एजेंसी इंडियन साइंस कम्युनिकेशन सोसाइटी के कार्यकारी सचिव और राज्य मुख्य अन्वेषक डॉ. वीपी सिंह ने कहा कि हमें बच्चों में अनुसंधान की भावना विकसित करनी है। शोध के लिए पांच विषयों – अपशिष्ट प्रबंधन, ऊर्जा, जल, भोजन, कृषि एवं स्वास्थ्य तथा स्थिरता हेतु भारतीय ज्ञान प्रणालियों प्रयोग के आधार पर प्रोजेक्ट तैयार करवाना है। वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी रामकुमार ने कहा कि यहां आंचलिक विज्ञान नगरी में ऐसे बहुत से मॉडल हैं जिनको देखकर बच्चे अपना प्रोजेक्ट राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के लिए तैयार कर सकते हैं।

उन्होंने खेल खेल में विज्ञान सिखाने पर बल दिया। जिला अकादमिक समन्वयक डॉ. मनीष कुमार श्रीवास्तव ने पंजीकरण की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे भारत सरकार की वेबसाइट www.n-csc.in पर रजिस्ट्रेशन कर इस कार्यक्रम में निशुल्क प्रतिभाग कर सकते हैं। जिला समन्वयक और वरिष्ठ विज्ञान शिक्षक डॉ. सत्यम शिवम सुंदरम ने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक विद्यार्थियों का इस कार्यक्रम के लिए पंजीकरण कराएं जिससे उत्तर प्रदेश किसी अन्य राज्य से पीछे न रहे। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में बचपन से ही वैज्ञानिक शोध की प्रवृत्त विकसित करना है। कार्यशाला में लखनऊ जनपद के 110 विज्ञान शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। डॉ. अनूप चतुर्वेदी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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