‘बांग्लादेश बन रहा है दूसरा पाकिस्तान’, शेख हसीना के बेटे का बड़ा दावा, दो साल बाद हसीना ने भी तोड़ी चुप्पी

नई दिल्ली/ढाका: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे और पूर्व सलाहकार साजीब वाजेद जॉय ने भारत की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति भारत के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती बनती जा रही है और देश “एक और पाकिस्तान” बनने की दिशा में बढ़ रहा है।
नई दिल्ली में फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCC) के कार्यक्रम में शेख हसीना के वर्चुअल संबोधन से पहले जॉय ने कहा कि बांग्लादेश में विदेशी खुफिया एजेंसियों, विशेषकर ISI, को खुली छूट मिली हुई है। उन्होंने दावा किया कि यदि समय रहते हालात नहीं बदले गए, तो भविष्य में बांग्लादेश वैश्विक आतंकवाद का नया केंद्र बन सकता है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई सबूत पेश नहीं किया।
दो साल बाद पहली बार बोलीं शेख हसीना
सत्ता से हटने के करीब दो साल बाद शेख हसीना ने 5 अगस्त 2026 को पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। लगभग 25 मिनट के अपने वर्चुअल संबोधन में उन्होंने जुलाई-अगस्त 2024 के घटनाक्रम को याद करते हुए कहा कि शुरुआती छात्र आंदोलन शांतिपूर्ण था और उनकी सरकार बातचीत के लिए तैयार थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में कुछ संगठित समूहों ने छात्र आंदोलन का इस्तेमाल हिंसा फैलाने और सत्ता परिवर्तन के लिए किया।
‘आंदोलन के पीछे था मास्टरमाइंड’
शेख हसीना ने दावा किया कि यह आंदोलन स्वतःस्फूर्त नहीं था, बल्कि सुनियोजित तरीके से संचालित किया गया। उन्होंने कहा कि पर्दे के पीछे से पूरे घटनाक्रम को निर्देशित किया गया और इसका इस्तेमाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर सत्ता हासिल करने के लिए किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बांग्लादेश की मौजूदा सरकार उन्हें झूठे मुकदमों, संभावित मौत की सजा और दिखावटी न्यायिक प्रक्रिया के जरिए डराने की कोशिश कर रही है, लेकिन वह इससे नहीं डरेंगी।
‘दिसंबर में लौटूंगी बांग्लादेश’
शेख हसीना ने कहा कि पिछले दो वर्षों में बांग्लादेश के लोगों ने भय और अस्थिरता का सामना किया है। उन्होंने घोषणा की कि वह इस वर्ष दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का प्रयास करेंगी, चाहे इसके लिए उन्हें अपनी जान का जोखिम ही क्यों न उठाना पड़े। सुरक्षा कारणों से प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनका कैमरा बंद रखा गया और कार्यक्रम में केवल उनकी आवाज सुनाई दी। गौरतलब है कि 5 अगस्त 2024 को छात्र आंदोलन और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद वह बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं और तब से देश से बाहर रह रही हैं।







