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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ा तनाव, ईरान ने तेल टैंकर पर ड्रोन हमले का किया दावा

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब वैश्विक तेल व्यापार के सबसे अहम मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ तक पहुंच गया है। इस जलडमरूमध्य में बढ़ते सैन्य टकराव के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है और तेल की कीमतों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है।

न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने शनिवार, 7 मार्च को दावा किया कि उसने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में एक तेल टैंकर को निशाना बनाया है। बताया जा रहा है कि इस बार ईरान के निशाने पर मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला तेल टैंकर ‘Louise P’ था, जिसे अमेरिका से जुड़ा बताया जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने इस जहाज पर हमला करने के लिए एक सुसाइड ड्रोन का इस्तेमाल किया। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका और इजरायल, तेहरान के तेल ठिकानों पर हमले तेज कर रहे हैं।

ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर अमेरिका, इजरायल, यूरोप या उनके सहयोगी देशों के जहाज इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने की कोशिश करेंगे तो उन पर हमला किया जा सकता है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून और संबंधित प्रस्तावों के तहत युद्ध की स्थिति में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से आवागमन को नियंत्रित करने का अधिकार उन्हें है।

इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका चाहता है कि ईरान पूरी तरह आत्मसमर्पण करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो ईरान की सैन्य ताकत को इतना कमजोर कर दिया जाएगा कि वह लड़ने के काबिल न रहे। ट्रंप के इस बयान पर ईरान ने भी कड़ा जवाब दिया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि अमेरिका की यह उम्मीद कभी पूरी नहीं होगी और वह इसे केवल एक सपना ही मानते हैं।

वहीं ईरानी सेना के एक सैन्य प्रवक्ता ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई अमेरिकी जहाज फारस की खाड़ी में आता है तो उसे समुद्र में डुबो दिया जाएगा। यह बयान उस समय सामने आया जब डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह जल्द ही अमेरिकी नौसेना के जहाजों को तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए भेजेंगे, जो आमतौर पर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से होकर गुजरते हैं।

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