पश्चिम बंगाल में 15 बूथों पर दोबारा मतदान, मतगणना से पहले चुनाव आयोग ने कसी कमर

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के तहत दो सीटों के 15 बूथों पर दोबारा मतदान कराया जा रहा है। इन बूथों पर 29 अप्रैल को दूसरे चरण के दौरान मतदान हुआ था, लेकिन गड़बड़ी की शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने री-पोलिंग का फैसला लिया। राज्य में 4 मई को मतगणना होनी है, जिसे लेकर आयोग ने सुरक्षा और पारदर्शिता के व्यापक इंतजाम किए हैं।
इसी क्रम में भारतीय चुनाव आयोग ने कुल 242 नए पर्यवेक्षक तैनात किए हैं। इनमें 165 मतगणना पर्यवेक्षक और 77 पुलिस पर्यवेक्षक शामिल हैं। इनकी नियुक्ति का उद्देश्य मतगणना प्रक्रिया को सुरक्षित, शांतिपूर्ण, भयमुक्त और पारदर्शी बनाना है। चुनाव आयोग ने ये नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 20B के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए की हैं। इस दौरान सभी पर्यवेक्षक आयोग के प्रतिनियुक्ति पर रहेंगे और उसके नियंत्रण में काम करेंगे।
165 विधानसभा क्षेत्रों में, जहां एक से अधिक मतगणना हॉल बनाए गए हैं, वहां अतिरिक्त मतगणना पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं ताकि पूरी प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखी जा सके। वहीं, पुलिस पर्यवेक्षक मतगणना केंद्रों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर नजर रखेंगे, हालांकि उन्हें मतगणना हॉल में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
मतगणना प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने के लिए रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा ECINet सिस्टम के जरिए मतगणना कर्मियों, उम्मीदवारों और उनके एजेंटों को QR कोड आधारित फोटो पहचान पत्र जारी किए जाएंगे। बिना इस पहचान पत्र के किसी को भी मतगणना केंद्र में प्रवेश नहीं मिलेगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि मतगणना हॉल के अंदर मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति केवल मतगणना पर्यवेक्षक और रिटर्निंग अधिकारी को ही होगी।
हर राउंड के बाद मतों का क्रॉस-वेरिफिकेशन भी सुनिश्चित किया जाएगा। नियंत्रण इकाइयों से प्राप्त आंकड़ों को मतगणना सुपरवाइजर पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में दर्ज करेंगे और मतगणना एजेंटों के साथ साझा करेंगे। प्रत्येक टेबल पर तैनात माइक्रो-ऑब्जर्वर भी स्वतंत्र रूप से आंकड़े नोट करेंगे और राउंड के अंत में उनका मिलान कराया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।







