बिहार के 7136 उद्यमियों को 150 करोड़ की सौगात सीएम सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान

पटना: बिहार के युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत 7136 लाभुकों के खातों में करीब 150 करोड़ रुपये की राशि भेजी। यह रकम योजना के तहत मिलने वाली सहायता की पहली किस्त के रूप में जारी की गई है। प्रत्येक लाभुक को पहली किस्त के तौर पर दो लाख रुपये दिए गए हैं। पटना के बापू सभागार में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के लाभुक मौजूद रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करते हुए बिहार के विकास को लेकर सरकार की योजनाओं की जानकारी भी दी।
एक करोड़ परिवारों को उद्यमी बनाने का लक्ष्य
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य बिहार के एक करोड़ परिवारों को उद्यमिता से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा करने और लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बिहार में तैयार होने वाले उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार खरीद की व्यवस्था को मजबूत करेगी। सरकार बिहार में बने सामान की 25 से 40 प्रतिशत तक खरीद करने की दिशा में काम करेगी। उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में बिहार की तस्वीर और तकदीर बदलने का लक्ष्य है और इसके लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।
एक साल में सभी कृषि फीडर होंगे सोलरयुक्त
सम्राट चौधरी ने बिजली और कृषि क्षेत्र को लेकर भी बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार अगले एक साल में राज्य के सभी कृषि फीडरों को सोलर ऊर्जा से जोड़ने का काम पूरा करेगी। इससे किसानों को बिजली की उपलब्धता बेहतर करने के साथ कृषि क्षेत्र में लागत कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
क्या है मुख्यमंत्री उद्यमी योजना
मुख्यमंत्री उद्यमी योजना का उद्देश्य बिहार के युवाओं और महिलाओं को अपना कारोबार शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के तहत लाभुकों को कुल 10 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है। इसमें 5 लाख रुपये तक की राशि अनुदान के रूप में और बाकी 5 लाख रुपये तक की राशि ब्याज मुक्त ऋण के तौर पर उपलब्ध कराई जाती है। इस योजना के जरिए लाभुक अलग-अलग क्षेत्रों में अपना कारोबार शुरू कर सकते हैं। सरकार का जोर युवाओं को नौकरी तलाशने वाले की बजाय रोजगार देने वाला बनाने और राज्य में स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर है।







