SIR विवाद पर सीएम धामी का कांग्रेस पर पलटवार, बोले- अंतिम फैसले को देखकर बनाएं राय; नकल और जमीन के मुद्दे पर भी दिया जवाब

देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में प्रेस वार्ता कर चुनाव आयोग, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, युवाओं से जुड़े मुद्दों और कांग्रेस के आरोपों पर सरकार का पक्ष रखा। धामी ने कहा कि लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है और चुनाव आयोग के अंतिम फैसलों को आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर देखा जाना चाहिए।
SIR पर क्या बोले मुख्यमंत्री धामी?
मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों पर कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना जरूरी है, लेकिन किसी आंतरिक टिप्पणी को अंतिम निर्णय के तौर पर पेश करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी संस्थागत फैसले का आकलन पूरे रिकॉर्ड और आयोग के अंतिम निर्णय के आधार पर किया जाना चाहिए। धामी ने 26 सितंबर को चुनाव आयोग की बैठक का हवाला देते हुए कहा कि बैठक के बाद जारी नोट को पूर्ण आयोग की मंजूरी मिली थी। उनके मुताबिक, 24 जून 2025 को जारी SIR का मूल आदेश भी आयोग की सर्वसम्मति से जारी हुआ था। इसके बाद अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए SIR की समय-सारिणी को भी आयोग की मंजूरी मिली। मुख्यमंत्री ने एक रिपोर्ट में निर्वाचन आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों का जिक्र करते हुए कहा कि आंतरिक विचार-विमर्श और अंतिम संस्थागत फैसला अलग-अलग चीजें हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले पूरे दस्तावेज देखने चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी किया जिक्र
धामी ने बिहार में SIR से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने चुनाव आयोग की संवैधानिक और कानूनी शक्तियों के संदर्भ में इस प्रक्रिया को देखा है। उन्होंने यह भी कहा कि SIR से जुड़े विभिन्न प्रावधानों को लेकर चुनाव आयोग की ओर से स्पष्टीकरण दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र के मुद्दे पर भी आयोग के स्पष्टीकरण का जिक्र किया। उनके मुताबिक, यह मामला प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी से जुड़े प्रशासनिक विषय का था।
Form-6 और मतदाताओं के लिए क्या व्यवस्था?
धामी ने बताया कि SIR के दौरान ऐसे मतदाता जिन्हें दस्तावेजों के सत्यापन के लिए नोटिस जारी किया गया है और जिनके रिकॉर्ड में मैपिंग या तार्किक विसंगति है, उनके घर जाकर बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO दस्तावेज जुटा सकेंगे। चुनाव आयोग के 26 सितंबर के आधिकारिक नोट में भी ऐसी व्यवस्था का उल्लेख है। इसके अलावा रात के आश्रय स्थलों में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीब और बेघर नागरिकों के लिए हेल्प डेस्क और विशेष शिविर लगाने की बात कही गई है। पहली बार मतदाता बनने वाले और मतदाता सूची से छूटे लोगों के नाम जोड़ने के लिए भी अभियान चलाने की व्यवस्था बताई गई है।
ECINet पर होगी स्वतंत्र तकनीकी जांच
ECINet को लेकर उठ रहे सवालों पर भी मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग के फैसले का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसकी स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा की जाएगी। इसके लिए वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में समिति बनेगी, जिसमें IIT या IIIT के स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल किया जाएगा। आयोग के मुताबिक यह समिति यह जांचेगी कि ECINet संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं। आयोग ने आगे की बैठकों के एजेंडे को पहले साझा करने और बैठकों के मिनट्स जारी करने का फैसला भी किया है।
कांग्रेस पर धामी का हमला
प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अपनी राजनीतिक कमजोरियों को छिपाने के लिए प्रशासनिक और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रहा है। धामी ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी हार के लिए कभी EVM और अब संवैधानिक संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की जा रही है। राहुल गांधी को लेकर भी उन्होंने तीखी टिप्पणी की और कहा कि नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए उनके बयानों में अपेक्षित गंभीरता होनी चाहिए।
नकल के मुद्दे पर सरकार का पक्ष
राहुल गांधी के देहरादून दौरे के दौरान नकल के मुद्दे पर दिए गए बयान का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने नकल विरोधी कानून लागू किया है और नकल से जुड़े मामलों में कार्रवाई की गई है। धामी के मुताबिक, नकल के मामलों में 100 से ज्यादा आरोपियों को जेल भेजा गया है। उन्होंने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित रखना सरकार की प्राथमिकता है।
जाति के आधार पर राजनीति को लेकर भी बोले धामी
हल्द्वानी से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी घटना पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसके तथ्यों को देखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे से रही है। धामी ने कहा कि प्रदेश को जाति और वर्ग के आधार पर बांटने की राजनीति नहीं होनी चाहिए और सामाजिक एकता को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
जमीन के आरोपों पर विपक्ष से मांगे सबूत
जमीन से जुड़े कांग्रेस के आरोपों पर मुख्यमंत्री ने विपक्ष से प्रमाण सार्वजनिक करने को कहा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार या किसी सरकारी संस्था की ओर से नियमों के खिलाफ जमीन बेचने या आवंटित करने का कोई सबूत है तो उसे सामने रखा जाना चाहिए। धामी ने कहा कि केवल आरोप लगाने से कोई दावा तथ्य नहीं बन जाता। उन्होंने विपक्ष से दस्तावेज और प्रमाण के आधार पर अपनी बात रखने की मांग की।







