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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का देशव्यापी प्रदर्शन, लखनऊ से जम्मू तक सड़कों पर उतरे कार्यकर्ता

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी विवाद अब सड़क तक पहुंच गया है। कांग्रेस ने शुक्रवार को देशभर में चुनाव आयोग के कार्यालयों तक मार्च और प्रदर्शन का कार्यक्रम आयोजित किया। लखनऊ, जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़, गुवाहाटी समेत कई शहरों में कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन करते नजर आए। पार्टी की मांग है कि ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें और चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों की जांच कराई जाए। प्रदर्शनों के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ जैसे नारे लगाए। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

जम्मू में निर्वाचन भवन के बाहर प्रदर्शन

जम्मू में कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में निर्वाचन भवन के बाहर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की अगुवाई जम्मू-कश्मीर कांग्रेस प्रभारी नासिर हुसैन ने की। कार्यकर्ताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चुनाव आयोग से चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर जवाब देने की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था में लोगों का भरोसा बनाए रखना जरूरी है। पार्टी नेताओं ने मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग भी उठाई है।

राहुल गांधी के बयान के बाद तेज हुआ आंदोलन

मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर विवाद उस रिपोर्ट के बाद तेज हुआ, जिसमें चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों का जिक्र किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। इन मुद्दों में SIR, मतदाता सूची, फॉर्म-6 में बदलाव और वोटर नाम जोड़ने-हटाने से जुड़े मामले शामिल बताए गए। इसके बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। विपक्षी दलों की ओर से संसद में CEC को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने की तैयारी की भी जानकारी सामने आई है।

ज्ञानेश कुमार के कार्यक्रम भी हुए स्थगित

इस राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग ने CEC ज्ञानेश कुमार के दो प्रस्तावित कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं। इनमें मेरठ में 25 सितंबर को होने वाला कार्यक्रम और वाराणसी में 28 सितंबर को प्रस्तावित युवा मतदाता जागरूकता कार्यक्रम शामिल था। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कार्यक्रमों की तारीखों में बदलाव को प्रशासनिक और अन्य कारणों से जोड़कर बताया है।

महुआ मोइत्रा ने भी पुलिस में दी शिकायत

विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने 24 सितंबर को दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दी। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की है। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद अभी FIR दर्ज नहीं की है। महुआ मोइत्रा ने अपनी शिकायत में उन मीडिया रिपोर्टों का भी हवाला दिया, जिनमें चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेदों और SIR से जुड़े फैसलों पर आपत्तियों की बात कही गई थी।

विवाद की असली वजह क्या है?

दरअसल, विवाद की मुख्य वजह चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति से जुड़ी रिपोर्ट है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, SIR की प्रक्रिया और चुनावी डेटा से जुड़े फैसले शामिल थे। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए और पूरे मामले की जांच की मांग शुरू कर दी।

चुनाव आयोग ने आरोपों पर क्या कहा?

वहीं, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के आधार पर उठाए जा रहे सवालों को लेकर अपना पक्ष रखा है। आयोग का कहना है कि किसी भी संस्थान में फैसले से पहले अलग-अलग सुझाव और टिप्पणियां आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के मुताबिक, पिछले एक साल में लिए गए सभी अंतिम फैसले, जिनमें SIR से जुड़े फैसले भी शामिल हैं, पूरी कमिशन की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। यानी एक तरफ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल CEC के इस्तीफे और जांच की मांग को लेकर आंदोलन तेज कर रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग अपने फैसलों को सर्वसम्मत बताते हुए आरोपों को खारिज कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद संसद से लेकर सड़क तक और बढ़ने के आसार हैं।

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