नशे के खिलाफ 2029 की डेडलाइन तय, अमित शाह बोले- अब मीटिंग नहीं मिशन पर होगा फोकस

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश को नशे के खतरे से मुक्त करने के लिए सरकार के अगले बड़े लक्ष्य का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर 31 दिसंबर 2029 तक देश से ड्रग्स के कारोबार को जड़ से खत्म करने की दिशा में निर्णायक कार्रवाई करनी होगी। इसके लिए लक्ष्य के साथ समय-सीमा और जवाबदेही भी तय की जाएगी।
एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के प्रमुखों के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अमित शाह ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल केंद्र सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। राज्यों और केंद्र के विभिन्न विभागों को एकजुट होकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि जब तक सभी एजेंसियां मिलकर 2029 तक नशा-मुक्त भारत के लक्ष्य पर काम नहीं करेंगी, तब तक इस चुनौती से पूरी तरह निपटना मुश्किल होगा।
आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता का जिक्र
अमित शाह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने देश के सामने मौजूद कई बड़ी चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटा है। उन्होंने कश्मीर में आतंकवाद, नॉर्थ-ईस्ट में उग्रवाद और नक्सलवाद का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र ने राज्यों के सहयोग से ऐसी समस्याओं पर काम किया है, जिनका देश लंबे समय से सामना करता रहा है। गृह मंत्री ने कहा कि अब इसी तरह की गंभीरता नशे के खिलाफ अभियान में भी दिखानी होगी। उनके मुताबिक, नारकोटिक्स का नेटवर्क केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर देश की युवा पीढ़ी और आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता है।
अमित शाह बोले- नशे के खिलाफ लड़ाई सबसे कठिन
अमित शाह ने नारकोटिक्स के खिलाफ अभियान को बेहद चुनौतीपूर्ण बताते हुए कहा कि इस लड़ाई को बीच में छोड़ा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए युवाओं को देश के विकास से जोड़ना जरूरी है और इसके लिए भारत को नशे से मुक्त करना अहम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नशे के खिलाफ पहले से कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन अब अभियान को और ज्यादा प्रभावी बनाने की जरूरत है।
‘मीटिंग से मिशन और जब्ती से नेटवर्क तोड़ने तक बढ़ना होगा’
गृह मंत्री ने नशे के खिलाफ कार्रवाई के तरीके में बदलाव पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब केवल बैठकें करने और रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित रहने के बजाय कार्रवाई के ठोस नतीजे सामने आने चाहिए। अमित शाह के मुताबिक, एजेंसियों को बैठकों से मिशन, रिपोर्टिंग से परिणाम, केवल ड्रग्स की जब्ती से पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने और दर्ज मामलों से आगे बढ़कर दोषियों को सजा दिलाने पर ध्यान देना होगा। उन्होंने बताया कि पहली ANTF कॉन्फ्रेंस में नशे के खिलाफ एक संस्थागत व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया गया था। इसके बाद दूसरी बैठक में इस व्यवस्था को कार्रवाई में बदलने के लिए क्षमता निर्माण और अमल पर चर्चा हुई। अब तीसरे सम्मेलन में इसी रोडमैप को निर्णायक अभियान में बदलने की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य है।
31 दिसंबर 2029 तक ड्रग्स के कारोबार के खात्मे का लक्ष्य
अमित शाह ने कहा कि इस बार की ANTF कॉन्फ्रेंस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें नशे के खिलाफ अभियान के लिए स्पष्ट लक्ष्य, समय-सीमा और जवाबदेही तय की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 31 दिसंबर 2029 तक भारत से ड्रग्स के कारोबार को जड़ से खत्म करना है। गृह मंत्री ने साफ किया कि नशे के खिलाफ लड़ाई को केवल ड्रग्स की बरामदगी तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसके लिए पूरे सप्लाई नेटवर्क, तस्करी के रास्तों और उससे जुड़े तंत्र पर कार्रवाई करनी होगी। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय को इस अभियान की अहम कड़ी माना जा रहा है। अमित शाह ने कहा कि नशे के खिलाफ इस निर्णायक अभियान का सीधा संबंध देश के भविष्य और युवा पीढ़ी की सुरक्षा से है। सरकार अब तय समय-सीमा के भीतर इस चुनौती पर निर्णायक परिणाम हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य लेकर चल रही है।







