1993 मुंबई ब्लास्ट केस: अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, समय से पहले रिहाई की याचिका खारिज

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी ठहराए गए गैंगस्टर अबू सलेम को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने गुरुवार को सलेम की समय से पहले रिहाई की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने बॉम्बे हाई कोर्ट के अप्रैल में दिए फैसले को बरकरार रखा।
25 साल की सजा पूरी होने का दिया था हवाला
अबू सलेम की ओर से दलील दी गई थी कि जेल में बिताई अवधि और सजा में मिलने वाली छूट (रिमिशन) को जोड़ने पर उसकी 25 साल की सजा पूरी हो चुकी है। इसी आधार पर उसने समय से पहले रिहाई की मांग की थी। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसकी याचिका को समय से पहले दायर माना था। हाई कोर्ट के मुताबिक सलेम की 25 साल की अवधि 2030 में पूरी होगी। इसके बाद सलेम ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
प्रत्यर्पण की शर्तों का दिया था हवाला
अबू सलेम ने अपनी याचिका में भारत और पुर्तगाल के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते का भी हवाला दिया था। उसकी ओर से कहा गया था कि प्रत्यर्पण की शर्तों के तहत उसे भारत में मौत की सजा नहीं दी जा सकती और उसकी जेल की सजा 25 साल से अधिक नहीं हो सकती। सुप्रीम कोर्ट ने अब बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए उसकी समय से पहले रिहाई की मांग को खारिज कर दिया है। इससे पहले फरवरी 2026 में भी सुप्रीम कोर्ट अबू सलेम की रिहाई से जुड़ी याचिका खारिज कर चुका है।
क्या है 1993 मुंबई ब्लास्ट केस?
12 मार्च 1993 को मुंबई में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन हमलों में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, जबकि करीब 700 लोग घायल हुए थे। मामले में अबू सलेम को 2005 में पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। बाद में मुंबई ब्लास्ट मामले में उसकी भूमिका के लिए अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद फिलहाल अबू सलेम को समय से पहले रिहाई नहीं मिलेगी।







