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JNU में ‘लॉन्ग मार्च’ पर बवाल: बैरिकेड तोड़े, पुलिस से झड़प, 50 से ज्यादा छात्र हिरासत में

नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। 26 फरवरी को जेएनयू छात्रसंघ (JNUSU) द्वारा निकाले गए ‘लॉन्ग मार्च’ के दौरान कैंपस के नॉर्थ गेट पर छात्रों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हो गई। छात्र यूजीसी के नए नियम लागू करने और कुलपति को हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़कर कैंपस से बाहर निकलने की कोशिश की। पुलिस के रोकने पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस का आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पत्थर, जूते और बैनर फेंके तथा डंडों से हमला किया। यहां तक कि कुछ पुलिसकर्मियों को दांत से काटे जाने की भी बात सामने आई है। इस दौरान कई पुलिस अधिकारी घायल हुए।घायलों में किशनगढ़ के एसएचओ राजकुमार, सरोजनी नगर के एसएचओ अतुल त्यागी और वसंत कुंज के एसीपी वेद प्रकाश समेत अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं।

भारी पुलिस बल तैनात

मार्च को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस के साथ RAF और CRPF की तैनाती की गई थी। नॉर्थ गेट पर कई स्तर की बैरिकेडिंग की गई थी। पुलिस का कहना है कि छात्रों को पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि कैंपस के बाहर मार्च की अनुमति नहीं है और उन्हें परिसर के भीतर ही प्रदर्शन करने को कहा गया था। बावजूद इसके करीब 400 से 500 छात्र एकत्र हुए और दोपहर करीब 3:20 बजे मुख्य गेट की ओर बढ़े, जिसके बाद हालात बिगड़ गए।

50 से अधिक छात्र हिरासत में

हंगामे के बाद पुलिस ने 50 से अधिक छात्रों को हिरासत में लेकर बसों में बैठाया। हिरासत में लिए गए छात्रों को छुड़ाने के लिए कुछ प्रोफेसरों ने पुलिस अधिकारियों से बातचीत की। पुलिस का कहना है कि कई छात्र अपनी पहचान बताने से इनकार कर रहे हैं, इसलिए उन्हें फिलहाल छोड़ा नहीं जा सकता। वहीं छात्र नेताओं का आरोप है कि पुलिस ने लाठीचार्ज किया और प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी की। उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे।

प्रशासन का पक्ष

जेएनयू प्रशासन ने बयान जारी कर कहा कि जिन यूजीसी नियमों को लागू करने की मांग की जा रही है, उन पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा रखी है। ऐसे में उन्हें लागू करना अदालत की अवमानना होगा। प्रशासन का यह भी कहना है कि कुलपति और रजिस्ट्रार के पास नीतिगत बदलाव करने का अधिकार नहीं है। प्रशासन ने आरोप लगाया कि छात्रसंघ हिंसा और तोड़फोड़ के मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। महिला ओबीसी कुलपति पर लगाए गए आरोपों को भी प्रशासन ने निराधार और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। फिलहाल जेएनयू के मुख्य द्वार पर तनाव की स्थिति बनी हुई है। अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।

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