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टी20 वर्ल्ड कप से बाहर होने पर दासुन शनाका का फूटा गुस्सा, गेंदबाजों-बल्लेबाजों और नेगेटिव माहौल पर उठाए सवाल

आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में सह-मेजबान श्रीलंका का सफर निराशाजनक तरीके से समाप्त हो गया। घरेलू मैदान पर खेले गए मुकाबलों में श्रीलंका ने ग्रुप स्टेज में ऑस्ट्रेलिया को हराकर सुपर-8 में जगह बनाई थी, लेकिन इसके बाद टीम लय खो बैठी। जिम्बाब्वे से मिली हार ने टीम का मनोबल तोड़ दिया और लगातार हार के साथ उसका अभियान खत्म हो गया। टूर्नामेंट से बाहर होने के बाद श्रीलंका के कप्तान दासुन शनाका ने टीम के प्रदर्शन पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने गेंदबाजों और बल्लेबाजों दोनों की आलोचना की और टीम के आसपास के नकारात्मक माहौल को भी हार की बड़ी वजह बताया।

श्रीलंका क्यों हुआ बाहर

शनाका ने कहा कि टीम के चारों ओर काफी बाहरी नेगेटिविटी थी, जिसका असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर पड़ा। उन्होंने यह भी माना कि टूर्नामेंट की पिचें गेंदबाजों के अनुकूल थीं और टीम के कुछ प्रमुख खिलाड़ी पूरी तरह फिट नहीं थे। इन परिस्थितियों ने टीम की मुश्किलें बढ़ा दीं। श्रीलंका अपने घरेलू मैदान पर न्यूजीलैंड के खिलाफ 61 रन से हारकर सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर होने वाली पहली टीम बन गई। इसके अलावा टीम को जिम्बाब्वे और इंग्लैंड के खिलाफ भी हार का सामना करना पड़ा, जिससे वापसी की सभी उम्मीदें खत्म हो गईं।

नेगेटिव टिप्पणियों पर कप्तान का बयान

शनाका ने कहा कि खिलाड़ी कितनी भी सकारात्मक सोच रखने की कोशिश करें, लेकिन अगर बाहर लगातार नकारात्मक बातें हो रही हों तो उसका असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि बिना मैच देखे ही आलोचना करना श्रीलंकाई क्रिकेट के लिए नुकसानदायक है।कप्तान ने चिंता जताते हुए कहा कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों की सुरक्षा और मानसिक मजबूती के लिए सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। उनके अनुसार, स्टेडियम के बाहर माइक्रोफोन लेकर खड़े लोगों की टिप्पणियां टीम पर अतिरिक्त दबाव बनाती हैं।

बल्लेबाजों का खराब प्रदर्शन बना बड़ी वजह

श्रीलंका के बल्लेबाजों का प्रदर्शन लगातार दो मुकाबलों में बेहद निराशाजनक रहा। इंग्लैंड के खिलाफ टीम सिर्फ 95 रन पर सिमट गई, जबकि न्यूजीलैंड के खिलाफ 107 रन ही बना सकी।शनाका ने कहा कि शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों को जिम्मेदारी लेनी होगी। टीम एक या दो खिलाड़ियों पर निर्भर नहीं रह सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि टी20 क्रिकेट में सकारात्मक इरादे और जोखिम लेने की मानसिकता जरूरी है। अगर खिलाड़ी आक्रामक सोच के साथ खेलते हुए आउट होते हैं तो भी संतोष रहता है, लेकिन बिना इरादे के खेलने से सफलता नहीं मिल सकती।

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