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हरियाणा में खाद्य व औषधि सुरक्षा को बड़ा बूस्ट, 53.21 करोड़ मंजूर; 28 मोबाइल लैब वैन और करनाल लैब का आधुनिकीकरण

हरियाणा सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में खाद्य एवं औषधि सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 53.21 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इस राशि से 28 मोबाइल फूड टेस्टिंग लैबोरेटरी वैन शुरू की जाएंगी और करनाल स्थित जिला खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला को आधुनिक बनाया जाएगा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि यह पहल नागरिकों को तेज, वैज्ञानिक और सुलभ खाद्य जांच सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम है।

डॉ. मिश्रा के अनुसार, करनाल की जिला खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला के नवीनीकरण के लिए राज्य बजट से 90.29 लाख रुपये और Food Safety and Standards Authority of India से 50 लाख रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है। प्रयोगशाला की क्षमता बढ़ाने के लिए 10.50 लाख रुपये की लागत से 47 आधुनिक उपकरण शामिल किए गए हैं। Haryana Medical Services Corporation Limited के माध्यम से 4.63 करोड़ रुपये के उपकरण खरीदे जा रहे हैं और टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके अलावा करनाल लैब को एफएसएसएआई से 3.96 करोड़ रुपये की लागत से समर्पित माइक्रोबायोलॉजी सेक्शन के साथ अपग्रेड किया गया है।

नई दिल्ली से उपलब्ध राशि के तहत National Capital Region Planning Board, चंडीगढ़ में 4.44 करोड़ रुपये की लागत से माइक्रोबायोलॉजी लैब का निर्माण करा रहा है, जो 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है और मार्च 2026 तक तैयार होने की उम्मीद है। सेंट्रल-स्टेट शेयर ग्रांट के तहत 10.45 करोड़ रुपये से चंडीगढ़ फूड लैब का नवीनीकरण पूरा कर लिया गया है और इसे तीन हाई-एंड उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। हरियाणा में वर्तमान में चंडीगढ़ और करनाल में दो नोटिफाइड फूड टेस्टिंग लैब संचालित हैं, जिन्हें फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट, 2006 की धारा 43(1) के तहत एनएबीएल से एफएसएसएआई की मान्यता प्राप्त है। राज्य सरकार चरणबद्ध तरीके से आठ अत्याधुनिक फूड टेस्टिंग लैब स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है।

हाइजीनिक स्ट्रीट फूड को बढ़ावा देने के लिए अंबाला, करनाल, हिसार और गुरुग्राम को स्वच्छ स्ट्रीट फूड हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। अंबाला कैंट के गांधी ग्राउंड में 60 दुकानों वाला स्ट्रीट फूड हब फरवरी 2026 तक तैयार होगा। हिसार में लगभग 60 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इसे चालू वित्त वर्ष के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। करनाल के विश्वकर्मा चौक के पास वेस्टर्न यमुना कैनाल क्षेत्र में भूमि चिन्हित कर डीपीआर स्वीकृत की जा चुकी है, जिसे 2026-27 तक पूरा करने की योजना है। गुरुग्राम में टेंडर प्रक्रिया जारी है।

एफएसएसएआई द्वारा उपलब्ध कराई गई पांच मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन पहले से जिलों में संचालित हैं, जहां 20 रुपये प्रति सैंपल की दर से मौके पर ही जांच की सुविधा मिल रही है। एनसीआर क्षेत्रों में 28 नई वैन जुड़ने से जांच सेवाओं की पहुंच और व्यापक होगी। वहीं वर्ष 2025 में स्टेट ड्रग्स लैबोरेटरी की कार्यक्षमता भी बढ़ाई गई। एक जनवरी से 31 दिसंबर 2025 के बीच 6,266 दवा नमूने लिए गए, जिनमें से 5,063 का विश्लेषण किया गया। विभाग ने 14,910 दवा विक्रय इकाइयों का निरीक्षण कर 764 लाइसेंस निलंबित और 80 लाइसेंस रद्द किए। 4,916 नमूनों में से 3,417 की जांच की गई, जिनमें 11 सब-स्टैंडर्ड पाए गए।

कार्रवाई के दौरान 315 संयुक्त छापों में 593 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की जांच की गई। पांच निर्माण या ब्लड सेंटर लाइसेंस निलंबित किए गए, जबकि दवाओं, मेडिकल डिवाइस और कॉस्मेटिक्स के 52 नए निर्माण लाइसेंस जारी हुए। सात इकाइयों को विश्व स्वास्थ्य संगठन और जीएमपी मानकों के अनुरूप अपग्रेड किया गया। वर्ष के दौरान 56 मामलों की सुनवाई हुई, जिनमें 15 मामलों में फैसला आया और आठ में सजा सुनाई गई। दवाओं की अधिक कीमत और नियमों के उल्लंघन के 33 मामलों में सुधारात्मक कार्रवाई करते हुए 68 उत्पादन अनुमतियां निलंबित की गईं। डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि लैब आधुनिकीकरण, मोबाइल टेस्टिंग, सख्त प्रवर्तन और बुनियादी ढांचे के विस्तार के जरिए राज्य में सुरक्षित भोजन और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। उनका कहना है कि उन्नत जांच सुविधाओं और मजबूत निगरानी तंत्र से उपभोक्ताओं का विश्वास और मजबूत होगा।

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