Main Slideप्रदेश

सीएम मान–नायब सिंह सैनी बैठक में एसवाईएल विवाद पर पंजाब का स्पष्ट रुख, आपसी सहमति से समाधान पर जोर

चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ हुई बैठक के दौरान सतलुज–यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर विवाद पर पंजाब का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य के हितों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने दो टूक कहा कि पंजाब के पास किसी अन्य राज्य को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है, लेकिन बड़े भाई होने के नाते पंजाब हरियाणा के साथ टकराव नहीं, बल्कि आपसी सहमति से इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान चाहता है।

मुख्यमंत्री मान ने कहा कि पंजाब सरकार जल विवाद पर राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब के हिस्से के पानी की एक भी बूंद साझा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। एसवाईएल नहर को एक भावनात्मक मुद्दा बताते हुए उन्होंने कहा कि यदि इसे लागू किया गया तो राज्य में कानून-व्यवस्था की गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में पंजाब के पास एसवाईएल नहर के लिए आवश्यक भूमि तक उपलब्ध नहीं है।

पंजाब के जल संकट पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सतही जल की कमी के कारण भूमिगत जल संसाधनों पर अत्यधिक दबाव बढ़ गया है। राज्य के 153 ब्लॉकों में से 115 ब्लॉकों में पानी का अत्यधिक दोहन हो चुका है और भूमिगत जल निकासी की दर पूरे देश में सबसे अधिक है।

मुख्यमंत्री मान ने कहा कि तीन नदियों के कुल 34.34 मिलियन एकड़ फीट पानी में से पंजाब को केवल 14.22 एमएएफ, यानी करीब 40 प्रतिशत हिस्सा मिलता है, जबकि शेष 60 प्रतिशत पानी हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को जाता है, जबकि इन राज्यों से होकर कोई नदी नहीं बहती। उन्होंने कहा कि पंजाब किसी को उसके वैध अधिकार से वंचित नहीं कर रहा, लेकिन अपने हितों की अनदेखी भी स्वीकार नहीं की जा सकती।

भाई घनैया जी की सेवा भावना और गुरबाणी की पंक्ति ‘पवण गुरु पाणी पिता माता धरत महत’ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब ने हमेशा दूसरों की जरूरतों को प्राथमिकता दी है और 60 प्रतिशत पानी गैर-रिपेरियन राज्यों को देता रहा है, जबकि बाढ़ से होने वाला नुकसान अकेले पंजाब को झेलना पड़ता है। ऐसे में किसी भी निर्णय में पंजाब के हितों को सर्वोपरि रखा जाना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहली बार है जब दोनों राज्य सरकारें इस मुद्दे के समाधान को लेकर गंभीर और सकारात्मक चर्चा कर रही हैं। उन्होंने इसे जीत या हार का सवाल नहीं, बल्कि पंजाब और पंजाबियों की भावनाओं और हितों से जुड़ा विषय बताया।

पानी को दोनों राज्यों की जीवन रेखा बताते हुए मुख्यमंत्री मान ने अधिकारियों के स्तर पर निरंतर संवाद के लिए एक संयुक्त वर्किंग ग्रुप गठित करने का सुझाव दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि नियमित बैठकों के जरिए इस विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकलेगा और दोनों राज्यों में विकास, प्रगति और समृद्धि का नया अध्याय शुरू होगा। बैठक में जल संसाधन मंत्री बरिंदर गोयल, मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. रवि भगत, जल संसाधन सचिव कृष्ण कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

Show More

Related Articles

Back to top button
Close
Close