देशभर में UGC के ‘इक्विटी रेगुलेशन 2026’ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज़

देश के कई प्रमुख शहरों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू ‘इक्विटी रेगुलेशन 2026’ के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। नए नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए ‘समान अवसर प्रकोष्ठ’ का गठन अनिवार्य किया गया है।
नियमों में पहली बार OBC को भी जातिगत भेदभाव से सुरक्षा प्राप्त समूहों की सूची में शामिल किया गया है, जिस पर कुछ जनरल कैटेगरी के छात्रों ने कड़ी आपत्ति जताई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि OBC को पहले से ही आरक्षण जैसी सुविधाएं मिल रही हैं, ऐसे में उन्हें समान अवसर प्रकोष्ठ के दायरे में क्यों रखा गया, यह समझ से परे है। कांग्रेस नेता हरीश रावत ने इस नए नियम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “UGC का यह कदम सनातन धर्म पर हमला है। भाजपा चाहे इसकी जितनी भी तारीफ करे, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उत्तराखंड में बढ़ते पलायन, बढ़ती बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और बिगड़ती कानून व्यवस्था जैसी समस्याओं पर भाजपा के पास कोई सकारात्मक समाधान नहीं है।”
विरोध का एक अनोखा स्वरूप उत्तर प्रदेश के रायबरेली में देखने को मिला, जहां भाजपा नेता और सामाजिक कार्यकर्ता उन नेताओं को चूड़ियां भेजने का अभियान चला रहे हैं, जो इस एक्ट पर मौन हैं। महेंद्र पांडे ने कहा कि जनता ने जिन नेताओं को विधायक और मंत्री बनाया, वे छात्र हितों और UGC एक्ट के विरोध पर चुप्प हैं; ऐसे नेताओं को राजनीति छोड़ देनी चाहिए और पद महिलाओं को सौंप देना चाहिए, जो निर्भीक होकर राजनीति कर सकें। इस बीच, UGC के नए नियमों के खिलाफ दायर याचिका पर चीफ जस्टिस की बेंच के सामने जल्द सुनवाई की मांग की जाएगी। याचिकाकर्ता के वकील मुख्य न्यायाधीश से इस याचिका पर शीघ्र सुनवाई की अपील करेंगे।







