कर्तव्य पथ पर दिखी नए भारत की सैन्य ताकत, ऑपरेशन सिंदूर की झांकी ने दिया सख्त संदेश

77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर सोमवार को पूरी दुनिया ने दिल्ली के कर्तव्य पथ पर नए भारत की सैन्य शक्ति और आत्मविश्वास का नजारा देखा। भारतीय सेना के शौर्य प्रदर्शन और राफेल व सुखोई लड़ाकू विमानों की गर्जना ने दुश्मनों को स्पष्ट संदेश दे दिया। इस मौके पर ऑपरेशन सिंदूर का प्रतीकात्मक रीप्ले भी देखने को मिला, जब भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर आसमान में ऑपरेशन सिंदूर का झंडा लेकर उड़ान भरते नजर आए।
इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड की मुख्य थीम ‘वंदे मातरम्’ रखी गई। परेड के दौरान कर्तव्य पथ पर कुल 30 झांकियां निकाली गईं, जो ‘स्वतंत्रता का मंत्र–वंदे मातरम्, समृद्धि का मंत्र–आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को दर्शाती हैं। इसी क्रम में भारतीय वायुसेना के 29 एयरक्राफ्ट ने भव्य फ्लाईपास्ट किया, जिनमें 16 फाइटर जेट, 4 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और 9 हेलीकॉप्टर शामिल थे। सभी विमानों ने 8 अलग-अलग फॉर्मेशन में उड़ान भरी।
परेड में ऑपरेशन सिंदूर की झांकी खास आकर्षण का केंद्र रही। इसमें सुखोई फाइटर जेट से दागी जाने वाली ब्रह्मोस मिसाइल को प्रदर्शित किया गया। साथ ही राफेल, सुखोई, एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम, आकाश मिसाइल और आधुनिक काउंटर-ड्रोन गन्स का भी प्रदर्शन किया गया। इन सैन्य प्रदर्शनों के जरिए पड़ोसी देश पाकिस्तान को साफ संदेश दिया गया कि भारत की सैन्य तैयारी और क्षमता पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है।
कर्तव्य पथ पर टी-90 भीष्म टैंक, अर्जुन एमके-1 मुख्य युद्धक टैंक और नाग मिसाइल सिस्टम (ट्रैक्ड) एमके-2 की दमदार मौजूदगी भी देखने को मिली। इसके अलावा दिव्यास्त्र और शक्तिबाण जैसी अत्याधुनिक प्रणालियों का प्रदर्शन किया गया, जो आधुनिक तकनीक से लैस हैं। परेड में तोपखाने की दिशा तय करने के लिए नियोजित झुंड ड्रोन, टेथर्ड ड्रोन सिस्टम और स्वदेशी सामरिक हाइब्रिड यूएवी ‘ज़ोल्ट’ के जरिए उन्नत निगरानी क्षमताओं का भी प्रदर्शन किया गया।
इस अवसर पर डीआरडीओ द्वारा विकसित की जा रही लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइल एलआर-एएसएचएम को भी प्रमुखता से दर्शाया गया। यह हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल स्थिर और गतिमान लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम है और 1500 किलोमीटर तक की दूरी तक विभिन्न पेलोड ले जाने के लिए डिजाइन की गई है। यह मिसाइल अर्ध-बैलिस्टिक प्रक्षेपवक्र पर उड़ान भरती है और हाइपरसोनिक गति के कारण दुश्मन के रडार से बचने में सक्षम है।
एलआर-एएसएचएम के सफल विकास के साथ भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है, जिनके पास हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक मौजूद है। कुल मिलाकर, इस गणतंत्र दिवस परेड ने भारत की सैन्य शक्ति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और रणनीतिक दृढ़ता को पूरी दुनिया के सामने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।







