मथुरा में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के लिए तीन दिवसीय ‘दिव्य जननी’ प्रशिक्षण शुरू

मथुरा। शिशु के विकास और उसके भविष्य के लिए गर्भवती मां का न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहना अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब मां तनावमुक्त और खुश रहती है, तो शिशु के विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अंतर्राष्ट्रीय संस्था हार्टफुलनेस के ग्लोबल गाइड पद्म भूषण से सम्मानित कमलेश डी. पटेल दाजी के मार्गदर्शन में लंबे शोध के उपरांत दिव्य जननी कार्यक्रम तैयार किया गया है। उक्त कार्यक्रम गर्भवती महिलाओं व उनके होने वाले शिशु के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत लाभप्रद है।
जिला प्रशासन, मथुरा व उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सहयोग से हार्टफुलनेस एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के लिए तीन दिवसीय’दिव्य जननी प्रशिक्षण कार्यक्रम’ का आयोजन मथुरा के नंदगांव, छाता, गोवर्धन, मथुरा सिटी एवं ग्रामीण, फरह, राया, बलदेव, नौहझील व मांट ब्लॉक में 22 से 24 जनवरी, 2026 में किया जा रहा है। कार्यशाला में मथुरा जनपद में संचालित बाल विकास परियोजनाओं में तैनात आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां उत्साहपूर्वक प्रतिभाग कर रही हैं। कार्यक्रम के अंतर्गत शरीर के लिए शिथिलीकरण, माइंड के लिए मेडिटेशन तथा स्व से जुड़ाव के लिए प्रार्थना की तकनीक सिखायी जा रही है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले दिन हार्टफुलनेस प्रशिक्षकों द्वारा गर्भवती महिलाओं के शारीरिक सेहत के साथ ही मानसिक रूप से स्वस्थ रहने की उपयोगिता को उल्लेखित किया गया। गर्भवती मां अगर तनाव में रहती हैं तो इसका सीधा असर गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर पड़ता है। इस कारण से गर्भवती मां का मानसिक स्वास्थ्य अत्यंत जरूरी है। शारीरिक स्वास्थ्य एवं मानसिक विकास के लिए ध्यान से होने वाले सकारात्मक प्रभावों को न सिर्फ कार्यक्रम में बताया गया, बल्कि उनका अनुभव भी कराया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि शिथिलीकरण रिलैक्सेशन मन एवं शरीर को शिथिल एवं तनावमुक्त करने का अमोघ साधन है।
हार्टफुलनेस एजुकेशन ट्रस्ट, उत्तर प्रदेश की प्रोग्राम डायरेक्टर शालिनी महरोत्रा ने बताया कि हार्टफुलनेस प्रैक्टिस का नियमित अभ्यास करने वाली गर्भवती महिलाओं के होने वाले बच्चे शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से अधिक परिपक्व होते हैं। वास्तव में ऐसी माताएं दिव्य जननी बनती हैं व दिव्य शिशु को जन्म देती हैं। हार्टफुलनेस प्रैक्टिस हृदय-आधारित ध्यान की एक सरल और आधुनिक पद्धति है, जो मानसिक शांति, संतुलन और आंतरिक आत्म-जुड़ाव के लिए यौगिक ट्रांसमिशन का उपयोग करती है। इसका उद्देश्य तनाव दूर करना, भावनात्मक जटिलताओं को साफ करना कर सहज जीवनशैली विकसित करना है। उल्लेखनीय है कि उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ सूरज पटेल के विशेष सहयोग से किया जा रहा है।










