ईरान में विद्रोह तेज, सत्ता परिवर्तन की अटकलें; रजा पहलवी, अमेरिका और रूहानी पर नजर

ईरान में पिछले कई दिनों से जारी जनविद्रोह थमने का नाम नहीं ले रहा है। सरकार की सख्त कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव में अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। दूसरी ओर, आम ईरानी नागरिक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। महंगाई और आर्थिक बदहाली से शुरू हुआ यह आंदोलन अब सीधे तौर पर अली खामेनेई के नेतृत्व वाली व्यवस्था को चुनौती देने लगा है।
दुनिया भर में यह सवाल उठने लगा है कि क्या इस्लामिक गणराज्य ईरान में सत्ता परिवर्तन संभव है। इसी बीच अमेरिका में निर्वासन में रह रहे ईरान के क्राउन प्रिंस रजा पहलवी प्रदर्शनकारियों के मुखर समर्थक के रूप में सामने आए हैं।
रजा पहलवी ने अमेरिका से मांगी मदद
ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे रजा पहलवी ने अमेरिका से ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए समर्थन मांगा है। उन्होंने कहा है कि अवसर मिलते ही वे ईरान लौटने के लिए तैयार हैं। 65 वर्षीय रजा पहलवी 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ही देश से बाहर रह रहे हैं। माना जा रहा है कि यदि मौजूदा सरकार गिरती है, तो वे ईरान के भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
क्रांति जैसे हालात बनने का दावा
एक रिपोर्ट के अनुसार 1979 के बाद पहली बार ईरान में क्रांति जैसी लगभग सभी परिस्थितियां बन चुकी हैं। देश की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है, सरकारी खजाना खाली होने की कगार पर है और ईरानी रियाल डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट पर है। बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और अब तक 500 से अधिक लोगों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं। इन हालात में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की सत्ता पर खतरा बताया जा रहा है।
क्या अमेरिका सीधे हस्तक्षेप करेगा?
कुछ विश्लेषक आशंका जता रहे हैं कि यदि अमेरिका ईरान में सैन्य हस्तक्षेप करता है, तो वह वेनेजुएला की तरह स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर सकता है। वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका ने वहां राजनीतिक दबाव बढ़ाया था। इसी तरह की भूमिका ईरान में भी निभाने की अटकलें लगाई जा रही हैं, हालांकि इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
हसन रूहानी भी दावेदार?
ईरान के पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी का नाम भी संभावित नेतृत्व विकल्पों में लिया जा रहा है। रूहानी 2013 से 2021 तक राष्ट्रपति रहे और पश्चिमी देशों के साथ उनके संबंध अपेक्षाकृत बेहतर माने जाते हैं। वे अमेरिका के राष्ट्रपति से सीधे बातचीत करने वाले पहले ईरानी नेता भी रहे हैं। ऐसे में यदि सत्ता परिवर्तन होता है, तो रूहानी भी एक समझौतावादी चेहरे के रूप में उभर सकते हैं। फिलहाल ईरान की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह विद्रोह सत्ता परिवर्तन तक पहुंचता है या मौजूदा शासन हालात पर नियंत्रण पाने में सफल रहता है।







