लैंड फॉर जॉब स्कैम: लालू परिवार पर कोर्ट का शिकंजा, तेजस्वी-तेज प्रताप समेत 41 पर आरोप तय

पटना। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए कानूनी मुश्किलें फिर से बढ़ गई हैं। शुक्रवार, 9 जनवरी को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने ‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाले में अपना फैसला सुनाते हुए लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती और हेमा यादव सहित कुल 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं।
हालांकि, साक्ष्यों की कमी के चलते अदालत ने इसी मामले में 52 अन्य आरोपियों को बरी भी किया है। कोर्ट ने अगली प्रक्रिया के लिए 29 जनवरी की तारीख तय की है, जिसमें आरोपियों के बयानों को रिकॉर्ड किया जाएगा। वकील एजाज अहमद के अनुसार, इन सभी पर आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120B (साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 के तहत मुकदमा चलेगा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने लालू परिवार की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ये सभी एक ‘आपराधिक गिरोह’ की तरह काम कर रहे थे। कोर्ट ने माना कि चार्जशीट से स्पष्ट होता है कि सरकारी नौकरियों को निजी संपत्तियां हथियाने के लिए एक सौदेबाजी के हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया।
अदालत ने लालू यादव और उनके परिवार द्वारा दी गई बरी किए जाने की याचिका को पूरी तरह से निराधार करार दिया। यह पूरा मामला 2004-2009 के बीच का है जब लालू यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे के ग्रुप डी पदों पर बिना किसी विज्ञापन या सूचना के भर्तियां की गईं और उन नियुक्तियों के बदले पटना के लोगों से करीब 1,05,292 वर्ग फुट जमीन लालू परिवार के सदस्यों के नाम लिखवाई गई।







