‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ का दूसरा चरण शुरू: पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए भगवंत मान सरकार का बड़ा ऐलान

पंजाब की भगवंत मान सरकार ने राज्य को नशा मुक्त बनाने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया है। ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान के पहले चरण की उल्लेखनीय सफलता के बाद आज से इस मुहिम के दूसरे चरण (फेज-2) की औपचारिक शुरुआत हो रही है। इस चरण का लक्ष्य न सिर्फ नशा तस्करी के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना है, बल्कि जमीनी स्तर पर जन-जागरूकता बढ़ाकर युवाओं को नशे से दूर रखना भी है।
पिछली सरकारों पर सरकार का तीखा हमला
इस मौके पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने पिछली सरकारों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सरकार का कहना है कि अकाली दल के शासनकाल में नशा तेजी से फैला और तत्कालीन नेताओं व मंत्रियों ने तस्करों को राजनीतिक संरक्षण दिया। वहीं, कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी नशे के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते पंजाब की युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में फंसती चली गई।
पहले चरण की सफलता, आंकड़ों में
मान सरकार ने नशे के खिलाफ अभियान के पहले चरण के आंकड़े साझा करते हुए इसे ऐतिहासिक सफलता बताया। सरकार के मुताबिक पिछले एक साल में:
- पूरे राज्य में नशे से जुड़े करीब 28,000 मामले दर्ज किए गए।
- 42,000 से अधिक नशा तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
- इनमें 350 से ज्यादा बड़े तस्कर शामिल हैं, जिनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की गई।
अवैध संपत्तियों पर चला बुलडोजर
अभियान के तहत सरकार ने तस्करों की अवैध कमाई पर भी सीधा वार किया। नशा कारोबार से अर्जित करोड़ों रुपये की अवैध संपत्तियों को चिन्हित कर उन्हें कुर्क किया गया और कई जगहों पर बुलडोजर कार्रवाई की गई। सरकार का साफ संदेश है कि पंजाब में नशे के कारोबार से कमाई करने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं है।
दूसरे चरण में क्या होगा खास?
आज से शुरू हो रहे दूसरे चरण में पुलिस और प्रशासन नशे की सप्लाई चेन को जड़ से तोड़ने पर फोकस करेगा। इसके साथ ही मोहल्ला और गांव स्तर पर कमेटियों का गठन कर युवाओं और आम लोगों को इस मुहिम से जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक पंजाब का हर घर नशे की लत से मुक्त नहीं हो जाता।







